पंछीड़ा पावणा रे कांई बागा में मोयो रे देसी भजन
पंछीड़ा पावणा रे कांई बागा में मोयो रे देसी भजन
आ दुनिया तो थारी,
बावळी रे बेड़ा,
माया की मोटी,
छावनी रे बेड़ा,
बातां में रहयो बिलमाय,
पंछीड़ा पावणा रे कांई,
बागा में मोयो रे,
कांई माया में मोयो रे।।
सोने रे घड़े में विष घोलण,
आतो मीठी छूरी बण बोलणी रे,
आतो धोखा भरी संसार,
पंछीड़ा पावणा रे कांई,
बातां में खोयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
पाछो ठिकाणे थने,
आवणो रे गेल्या,
कठू आयो ने कठे,
जावणो रे गेल्या,
गैलां में रहग्यो रात,
पंछीड़ा पावणा रे,
कांई नींदा में सोयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
नारी ठग्यो थारा,
रूप ने रे गेल्या,
काम कमाई ठगगी,
पूत ने रे गेल्या,
काया ठग्यो परिवार,
पंछीड़ा पावणा रे अठे,
आज ठगायो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
बालपणो रे हंस,
खोवियो रे बीरा,
जोर जवानी में,
सोवियो रे बीरा,
वेद न आयो नहीं याद,
पंछीड़ा पावणा रे,
अब बुढ़ापे रोयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
भेरू शंकर समझाय,
रिया रे भेंड़ा,
आच्छा दिन थारा,
जाय रिया रे भेंड़ा,
हरि भज उतरौला पार,
पंछीड़ा पावणा रे,
अब मोड़ो नहीं होयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
आ दुनिया तो थारी,
बावळी रे बेड़ा,
माया की मोटी,
छावनी रे बेड़ा,
बातां में रहयो बिलमाय,
पंछीड़ा पावणा रे कांई,
बागा में मोयो रे,
कांई माया में मोयो रे।।
बावळी रे बेड़ा,
माया की मोटी,
छावनी रे बेड़ा,
बातां में रहयो बिलमाय,
पंछीड़ा पावणा रे कांई,
बागा में मोयो रे,
कांई माया में मोयो रे।।
सोने रे घड़े में विष घोलण,
आतो मीठी छूरी बण बोलणी रे,
आतो धोखा भरी संसार,
पंछीड़ा पावणा रे कांई,
बातां में खोयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
पाछो ठिकाणे थने,
आवणो रे गेल्या,
कठू आयो ने कठे,
जावणो रे गेल्या,
गैलां में रहग्यो रात,
पंछीड़ा पावणा रे,
कांई नींदा में सोयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
नारी ठग्यो थारा,
रूप ने रे गेल्या,
काम कमाई ठगगी,
पूत ने रे गेल्या,
काया ठग्यो परिवार,
पंछीड़ा पावणा रे अठे,
आज ठगायो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
बालपणो रे हंस,
खोवियो रे बीरा,
जोर जवानी में,
सोवियो रे बीरा,
वेद न आयो नहीं याद,
पंछीड़ा पावणा रे,
अब बुढ़ापे रोयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
भेरू शंकर समझाय,
रिया रे भेंड़ा,
आच्छा दिन थारा,
जाय रिया रे भेंड़ा,
हरि भज उतरौला पार,
पंछीड़ा पावणा रे,
अब मोड़ो नहीं होयो रे,
कांई बागां में मोयो रे।।
आ दुनिया तो थारी,
बावळी रे बेड़ा,
माया की मोटी,
छावनी रे बेड़ा,
बातां में रहयो बिलमाय,
पंछीड़ा पावणा रे कांई,
बागा में मोयो रे,
कांई माया में मोयो रे।।
पंछीडा पावणा रे कई बागा मे मोयो रे || Jagdish Vaishnav || Desi Bhajan || Shivam Studio Gudli
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Author - Saroj Jangir
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