जिंदगी गर मिले फिर जो मोहन वृंदावन में बसा दीजियेगा
जिंदगी गर मिले फिर जो मोहन
जिंदगी गर मिले फिर जो मोहन,
जिंदगी फिर मिलेगी तो मोहन,
वृंदावन में बसा दीजियेगा,
अपने चरणों की सेवा में रखकर,
दास मुझको बना लीजिएगा।
जिसकी नैया हो तेरे हवाले,
उसको दरिया की फिर क्या फिक्र है,
उसको दरिया की फिर क्या फिक्र है,
जिसके माझी हो तुम मुरली वाले,
ऐसी नैया बना दीजिएगा।
जिस धरा पर थिरकते थे कान्हा,
उसके दर्शन की मन में कसक है,
उसके दर्शन की मन में कसक है,
जिस गली से निकलते थे मोहन,
उस गली से मिला दीजिएगा।
जब भी जाऊंगा द्वारे तुम्हारे,
देखकर तुमको आंसू बहेंगें,
देखकर तुमको आंसू बहेंगें,
मुख से कुछ भी न मैं कह सकूंगा,
तुम खुद ही समझ लीजिएगा।
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और समर्पण को प्रकट करता है। इसमें विनम्र प्रार्थना है कि हमें मोहन/कृष्ण की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने का अवसर मिले। वृंदावन की पवित्र धरती और मोहन की प्रिय गलियों के दर्शन की आकांक्षा और उनकी शरण में रहकर जीवन नैया पार होने का विश्वास इस भजन को अत्यंत मार्मिक बनाता है। यह भजन में बताया है कि जब हम कृष्ण के द्वार पर पहुंचेंगे, तो केवल आंसू ही हमारी भावना को व्यक्त करेंगे, और कृष्ण स्वयं हमारे हृदय की बात समझ लेंगे।
Vrindavan Mein Basa Dijiyega|वृंदावन में बसा दीजिएगा|Krishna Bhajan|Pushpendra Chauhan
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Author - Saroj Jangir
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