शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया,
धरा गगन मुस्काए।
मन में लगन तप में अगन नंगे पांव चली,
शिला पर बैठी योगिनी मन की जोत जली,
बिना अन्न बिना जल शिव का नाम पुकारा,
तीन लोक से न्यारी सती ने मन संकल्प उचारा,
जब तक शिव वर ना मिल जाए मेरा जन्म अधूरा,
अग्नि में जल जाएंगे प्राण प्रेम रहे ना अधूरा।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया धरा गगन मुस्काए।
आज महादेव बनें हैं दूल्हा सजी है बारात,
भूत-प्रेत संग नाच रहे हैं देखे त्रिलोक निहार,
नंदी है आगे नाग गले में रुद्राक्ष की माला,
अर्धचंद्र है शीश सजा गंगा करे उजियाला,
सभी देवगण ऋषि-मुनि आए गूंजे स्वर्ग के भजन,
शिवशक्ति का दिव्य मिलन है मंगलमय ये क्षण।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया धरा गगन मुस्काए।
सात फेरों में बंध गए जग के आधार,
आज से एक हुआ जग का शिव और शक्ति का प्यार,
अग्नि साक्षी मंत्र पवित्र देवों ने पुष्प बरसाए,
गंधर्व गान करें गुणगान भूत-गण भी मुस्काए,
सौभाग्यवती भव कहा ब्रह्मा ने आशीष दिया,
शिव संग रहे सदा देवी स्नेह अमर हो तेरा।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया धरा गगन मुस्काए।
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया,
धरा गगन मुस्काए।
मन में लगन तप में अगन नंगे पांव चली,
शिला पर बैठी योगिनी मन की जोत जली,
बिना अन्न बिना जल शिव का नाम पुकारा,
तीन लोक से न्यारी सती ने मन संकल्प उचारा,
जब तक शिव वर ना मिल जाए मेरा जन्म अधूरा,
अग्नि में जल जाएंगे प्राण प्रेम रहे ना अधूरा।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया धरा गगन मुस्काए।
आज महादेव बनें हैं दूल्हा सजी है बारात,
भूत-प्रेत संग नाच रहे हैं देखे त्रिलोक निहार,
नंदी है आगे नाग गले में रुद्राक्ष की माला,
अर्धचंद्र है शीश सजा गंगा करे उजियाला,
सभी देवगण ऋषि-मुनि आए गूंजे स्वर्ग के भजन,
शिवशक्ति का दिव्य मिलन है मंगलमय ये क्षण।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया धरा गगन मुस्काए।
सात फेरों में बंध गए जग के आधार,
आज से एक हुआ जग का शिव और शक्ति का प्यार,
अग्नि साक्षी मंत्र पवित्र देवों ने पुष्प बरसाए,
गंधर्व गान करें गुणगान भूत-गण भी मुस्काए,
सौभाग्यवती भव कहा ब्रह्मा ने आशीष दिया,
शिव संग रहे सदा देवी स्नेह अमर हो तेरा।
शिव वर पाए पार्वती मंगल गीत सुहाए,
कैलाश बसे भोले बाबा देव साजे आए,
आज नाच रही काशी गंगा भी इतराए,
महा विवाह का उत्सव आया धरा गगन मुस्काए।
पार्वती जी ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति रूप में प्राप्त किया था। उनके अटूट संकल्प और प्रेम ने तीनों लोकों को चकित कर दिया। शिव-पार्वती के विवाह के दिन समस्त सृष्टि आनंदित हो उठी, देवताओं ने भजन गाए और गंगा भी उल्लासित हो गई। शिवजी की अनोखी बारात में भूत-प्रेतों के साथ देवगण भी उपस्थित थे। विवाह के पवित्र मंत्रों के साथ शिव और शक्ति का दिव्य मिलन संपन्न हुआ जिससे संपूर्ण जगत को कल्याण और शुभता का वरदान मिला। जय शिव शक्ति।
महाशिवरात्रि 2025 | शिव वर पाए पार्वती | Mahashivratri Bhajan | Mahadev Song | Shiv Shakti Bhajan
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Author - Saroj Jangir
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