बरसाने वाली राधा है गोकुल वाली राधा
बरसाने वाली राधा है गोकुल वाली
(मुखड़ा)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
बरसाने वाली राधा है गोकुल वाली राधा।
आओ राधा, आओ राधा, राधा राधा।।
(अंतरा)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
जिनके बगैर है मुरली वाला आधा,
वह कृष्ण प्यारी राधा।।
(अंतरा)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
ब्रज की देवी राधा, मथुरा की देवी राधा।
सबके काम बनाती राधा, कृष्ण से मिलती राधा।।
(अंतरा)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
श्री राधा, जय राधा, तुम गाओ राधा।
वृषभानु दुलारी राधा, हम सबकी माता राधा।।
(पुनरावृत्ति)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।।
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
बरसाने वाली राधा है गोकुल वाली राधा।
आओ राधा, आओ राधा, राधा राधा।।
(अंतरा)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
जिनके बगैर है मुरली वाला आधा,
वह कृष्ण प्यारी राधा।।
(अंतरा)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
ब्रज की देवी राधा, मथुरा की देवी राधा।
सबके काम बनाती राधा, कृष्ण से मिलती राधा।।
(अंतरा)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।
श्री राधा, जय राधा, तुम गाओ राधा।
वृषभानु दुलारी राधा, हम सबकी माता राधा।।
(पुनरावृत्ति)
राधा ओ राधा, राधा ओ राधा।।
राधे राधे बरसाने वाली राधे || ORIGINAL RADHE RADHE BARSANE WALI RADHE Barsane Wali Radha Hai Bhajan
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राधा का नाम ही वह मंत्र है, जो हृदय को कृष्ण की ओर ले जाता है, जैसे नदी सागर से मिलने को आतुर रहती है। राधा केवल एक नाम नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और शक्ति की साकार मूर्ति हैं। बरसाने और गोकुल की गलियों में बसी राधा हर भक्त के मन में विराजती हैं, जैसे सूरज की किरणें हर कोने को रोशन करती हैं।
राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं, यह भाव प्रेम की उस गहराई को दर्शाता है, जो एक-दूसरे को पूर्ण करता है। जैसे बिना रंग के चित्र फीका रहता है, वैसे ही कृष्ण की मुरली राधा के प्रेम के बिना अधूरी है। यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम परस्पर पूरक होता है, जो आत्मा को ऊँचा उठाता है।
राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं, यह भाव प्रेम की उस गहराई को दर्शाता है, जो एक-दूसरे को पूर्ण करता है। जैसे बिना रंग के चित्र फीका रहता है, वैसे ही कृष्ण की मुरली राधा के प्रेम के बिना अधूरी है। यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम परस्पर पूरक होता है, जो आत्मा को ऊँचा उठाता है।
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Author - Saroj Jangir
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