शेरांवाली नूं पसन्द किवें आई भजन

शेरांवाली नूं पसन्द किवें आई मातारानी भजन

शेरांवाली नूं पसन्द किवें आई,
चुन्नी गुहड़े लाल रंग दी।
मेहरां वाली नूं पसन्द किवें आई,
मेरी मां नूं पसन्द किवें आई,
चुन्नी गुहड़े लाल रंग दी।।

किस ने रंगी मइया, किस ने रंगाई ए,
केहड़े शहर तों बन के आई,
चुन्नी गुहड़े लाल रंग दी।
शेरां वाली नूं पसन्द किवें आई...

ललारियां ने रंगी चुन्नी, भगतां रंगाई ए,
जम्मू शहर तों बन के आई,
चुन्नी गुहड़े लाल रंग दी।
शेरां वाली नूं पसन्द किवें आई...

धन धन चुन्निए तेरी तक़दीर नूं,
तेरे नसीब नूं, जिहड़ी मां दे सिर ते ओढ़ाई,
चुन्नी गुहड़े लाल रंग दी।
शेरां वाली नूं पसन्द किवें आई...

सूरज दा रंग सूहा, चुन्नी उत्ते चढ़िया,
अंबरां ते तारियां नूं रीज़ां नाल जड़िया।
चुन्नी अंबरां तों उतर के आई,
चुन्नी गुहड़े लाल रंग दी।
शेरां वाली नूं पसन्द किवें आई...

विष्णु, ब्रह्मा ते शिव जी महेश ए,
दुर्गा ने चुन्नी विच कीता प्रवेश ए।
फिर मइया जी दे गल विच पाई,
चुन्नी गुहड़े लाल रंग दी।
शेरां वाली नूं पसन्द किवें आई...


चुन्नी अम्बरा तो उत्तर के आई चुन्नी गूढ़े लाल रंग दी

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(Sheran Wali Maa Bhajan in Punjabi)

ਸ਼ੇਰਾਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ,
ਚੁੰਨੀ ਗੂਹੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ।
ਮੇਹਰਾਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ,
ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ,
ਚੁੰਨੀ ਗੂਹੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ।


ਕਿਸ ਨੇ ਰੰਗੀ ਮਈਆ, ਕਿਸ ਨੇ ਰੰਗਾਈ ਏ,
ਕੇਹੜੇ ਸ਼ਹਿਰ ਤੋਂ ਬਣ ਕੇ ਆਈ,
ਚੁੰਨੀ ਗੂਹੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ।
ਸ਼ੇਰਾਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ...

ਲਲਾਰੀਆਂ ਨੇ ਰੰਗੀ ਚੁੰਨੀ, ਭਗਤਾਂ ਰੰਗਾਈ ਏ,
ਜੰਮੂ ਸ਼ਹਿਰ ਤੋਂ ਬਣ ਕੇ ਆਈ,
ਚੁੰਨੀ ਗੂਹੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ।
ਸ਼ੇਰਾਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ...

ਧੰਨ ਧੰਨ ਚੁੰਨੀਏ ਤੇਰੀ ਤਕਦੀਰ ਨੂੰ,
ਤੇਰੇ ਨਸੀਬ ਨੂੰ,
ਜੇਹੜੀ ਮਾਂ ਦੇ ਸਿਰ ਤੇ ਓੜ੍ਹਾਈ,
ਚੁੰਨੀ ਗੂਹੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ।
ਸ਼ੇਰਾਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ...

ਸੂਰਜ ਦਾ ਰੰਗ ਸੂਹਾ, ਚੁੰਨੀ ਉੱਤੇ ਚੜ੍ਹਿਆ,
ਅੰਬਰਾਂ ਤੇ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਰੀਝਾਂ ਨਾਲ ਜੜ੍ਹਿਆ।
ਚੁੰਨੀ ਅੰਬਰਾਂ ਤੋਂ ਉੱਤਰ ਕੇ ਆਈ,
ਚੁੰਨੀ ਗੂਹੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ।
ਸ਼ੇਰਾਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ...

ਵਿਸ਼ਨੂੰ ਬ੍ਰਹਮਾ ਜੀ ਤੇ ਸ਼ਿਵ ਜੀ ਮਹੇਸ਼ ਏ,
ਦੁਰਗਾ ਨੇ ਚੁੰਨੀ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਏ।
ਫਿਰ ਮਈਆ ਜੀ ਦੇ ਗਲ ਵਿੱਚ ਪਾਈ,
ਚੁੰਨੀ ਗੂਹੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ।
ਸ਼ੇਰਾਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਕਿਵੇਂ ਆਈ...
 
शेरांवाली माँ को लाल रंग की चुन्नी ऐसी प्रिय है, जैसे हृदय में भक्ति की लौ। यह चुन्नी केवल वस्त्र नहीं, माँ की महिमा और भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है। जम्मू के ललारियों ने इसे भक्तों के प्रेम से रंगा, मानो सूरज ने इसमें अपनी लाली उड़ेल दी और तारों ने रीझकर इसे सजाया।

यह चुन्नी इतनी भाग्यशाली है कि माँ के सिर पर सुशोभित होती है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, शिव और स्वयं दुर्गा का आशीष समाया है। जैसे माँ का आँचल हर संकट से बचाता है, वैसे ही यह लाल चुन्नी उनकी कृपा का प्रतीक है। संत कहते हैं, माँ की भक्ति में रंग जाओ, वह हर मनोकामना पूर्ण करती है। चिंतक देखता है, यह लाल रंग प्रेम और शक्ति का संदेश देता है। धर्मगुरु सिखाते हैं, मेहरांवाली के चरणों में श्रद्धा अर्पित करो, उनकी चुन्नी की छाँव में सुख और शांति है।

माँ, तेरी लाल चुन्नी की तरह हमारा मन भी तुझ में रंग जाए, और तेरा दर्शन सदा मिले।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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