अक्षय तृतीया है आई भजन
अक्षय तृतीया है आई भजन
(मुखड़ा)
सभी को कोटि-कोटि बधाई,
सभी को कोटि-कोटि बधाई,
शुक्ल पक्ष वैशाख मास की, अक्षय तृतीया है आई।।
(अंतरा)
अक्षय तृतीया से हुई थी, त्रेता युग शुरुआत।
भगवान परशुराम जयंती का, यह दिन है खास।
अति उत्तम, अति पावन उत्सव, अति उत्तम फलदायी – सभी को।।
(अंतरा)
अक्षय तृतीया का महोत्सव, वृंदावन में भारी।
चरण दर्शन श्री बाँके बिहारी, साल में हो एक बारी।
सर्वांग लगे लेप चंदन का, बरसे शीतलता – सभी को।।
(अंतरा)
सर्व सिद्धि यह स्वयं मुहूर्त, शुभ दिन मंगलकारी।
विष्णु-लक्ष्मी पूजन हो, हो मनभावन खरीदारी।
मधुप हरि-हरि भजन करो, रहो हरि चरणन लिव लाई – सभी को।।
(अंतरा)
अक्षय तृतीया से हुई थी, त्रेता युग शुरुआत।
भगवान परशुराम जयंती का, यह दिन है खास।
अति उत्तम, अति पावन उत्सव, अति उत्तम फलदायी – सभी को।।
(अंतरा)
अक्षय तृतीया का महोत्सव, वृंदावन में भारी।
चरण दर्शन श्री बाँके बिहारी, साल में हो एक बारी।
सर्वांग लगे लेप चंदन का, बरसे शीतलता – सभी को।।
(अंतरा)
सर्व सिद्धि यह स्वयं मुहूर्त, शुभ दिन मंगलकारी।
विष्णु-लक्ष्मी पूजन हो, हो मनभावन खरीदारी।
मधुप हरि-हरि भजन करो, रहो हरि चरणन लिव लाई – सभी को।।
कोई व्रत करें या ना करें पर अक्षय तृतीया जरूर करें | Premanand Ji Maharaj
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अक्षय तृतीया का पावन पर्व जीवन में सुख, समृद्धि और शुभता का संदेश लाता है। यह त्रेता युग की शुरुआत और परशुराम जयंती का उत्तम अवसर है, जो धर्म और शक्ति का प्रतीक है। वृंदावन में बाँके बिहारी के चरणों का दर्शन और चंदन का लेप मन को शीतलता और भक्ति से भर देता है। यह दिन अपने आप में सिद्ध मुहूर्त है, जहाँ विष्णु-लक्ष्मी की पूजा और हरि भजन से मन की हर इच्छा पूर्ण होती है। जैसे खरीदारी इस दिन शुभ फल देती है, वैसे ही प्रभु के चरणों में लीन होना जीवन को अक्षय सुख से समृद्ध करता है। यह पर्व सिखाता है कि सच्ची भक्ति और शुभ कर्म ही मनुष्य को अनंत आनंद और मंगल की ओर ले जाते हैं।
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Author - Saroj Jangir
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