Kishkinda Kand

उमा राम सम हित जग माहीं किष्किन्धा काण्ड

उमा राम सम हित जग माहीं किष्किन्धा काण्ड उमा राम सम हित जग माहीं। गुरु पितु मातु बंधु प्रभु नाहीं।। सुर नर मुनि सब कै यह रीती। स्वारथ लागि ...

Saroj Jangir

जे न मित्र दुख होहिं दुखारी किष्किन्धा काण्ड

जे न मित्र दुख होहिं दुखारी किष्किन्धा काण्ड जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी।। निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक द...

Saroj Jangir