मेरी सुनलो मारुति नंदन हनुमान भजन
मेरी सुन लो मारुति नंदन, काटो मेरे दुख के बंधन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते हैं दुख भंजन,
मेरी सुन लो मारुति नंदन, काटो मेरे दुख के बंधन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते है दुख भञ्जन,
मुझ पेर भी करुणा करना, मई आया शरण तुम्हारी,
मैं जोड़े हाथ खड़ा हूँ, तेरे दर का बना भिखारी,
तुम सबसे बड़े भंडारी, मई पानी तुम हो चंदन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते हैं, दुख भंजन,
मेरी सुनलो मारुति नंदन, काटो मेरे दुख के बंधन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते है दुख भंजन,
तेरा नाम बड़ा दुनियाँ में,
सब तेरा ही गुण गाएं इस जग के सब नर नारी,
चरणों में शीश नवाए, कर भाव से पार मुझे भी,
हे बाबा संकट मोचन, हे महावीर बजरंगी,
तुम्हे कहते हैं दुख भंजन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते हैं दुख भंजन,
मेरी सुन लो मारुति नंदन, काटो मेरे दुख के बंधन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते है दुख भञ्जन,
मुझ पेर भी करुणा करना, मई आया शरण तुम्हारी,
मैं जोड़े हाथ खड़ा हूँ, तेरे दर का बना भिखारी,
तुम सबसे बड़े भंडारी, मई पानी तुम हो चंदन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते हैं, दुख भंजन,
मेरी सुनलो मारुति नंदन, काटो मेरे दुख के बंधन,
हे महावीर बजरंगी, तुम्हे कहते है दुख भंजन,
तेरा नाम बड़ा दुनियाँ में,
सब तेरा ही गुण गाएं इस जग के सब नर नारी,
चरणों में शीश नवाए, कर भाव से पार मुझे भी,
हे बाबा संकट मोचन, हे महावीर बजरंगी,
तुम्हे कहते हैं दुख भंजन,
मारुती नंदन : मारुती नंदन का अर्थ है "वायु पुत्र". श्री हनुमान वायु पुत्र होने के कारण से ही मारुती नंदन कहलाते हैं। वायु से पैदा होने के कारन ही इन्हे बाल हनुमान के रूप में मारुती नंदन भी कहा जाता है।
दुख भंजन : तोड़ने वाला, मिटाने वाला, नष्ट करने वाला, भंग करने वाला। दुखों का नाश करने वाला दुःख भंजन कहलाता है। वीर श्री हनुमान जी अपने भक्तों के सभी कष्टों को समाप्त करते हैं इसलिए इनको दुःखभंजन भी कहा जाता है।
दुख भंजन : तोड़ने वाला, मिटाने वाला, नष्ट करने वाला, भंग करने वाला। दुखों का नाश करने वाला दुःख भंजन कहलाता है। वीर श्री हनुमान जी अपने भक्तों के सभी कष्टों को समाप्त करते हैं इसलिए इनको दुःखभंजन भी कहा जाता है।
MERI SUN LO MARUTI NANDAN FAMOUS HANUMAN BHAJAN
यह भी जानिये
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"मारुति नंदन" का अर्थ है हनुमान जी, जो मारुति (वायु देव) के पुत्र और भगवान राम के परम भक्त हैं। संपूर्ण अर्थ: "मारुति नंदन" का मतलब है "वायु देव का प्रिय पुत्र" या "पवन पुत्र", जो हनुमान जी का एक लोकप्रिय नाम है। यह उनके जन्म और दिव्य उत्पत्ति की ओर संकेत करता है, क्योंकि वे वायु देव और अंजनी के पुत्र हैं। हनुमान जी को इस नाम से पुकारना उनकी शक्ति, भक्ति और राम के प्रति समर्पण को सम्मान देने का एक तरीका है। |
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Author - Saroj Jangir
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