पढ़ो पोथी में राम लिखो तख्ती पे भजन
पढ़ो पोथी में राम लिखो तख्ती पे राम भजन
राम राम राम राम राम ॐ
राम राम राम राम राम राम
राम राम राम राम हरे राम राम राम
देखो आंखों से राम सुनो कानों से राम
बोलो जिव्हा से राम हरे राम राम राम
राम राम
पियो पानी में राम जीमो खाने में राम
चलो घूमने में राम हरे राम राम राम
राम राम
बाल्यावस्था में राम युवावस्था में राम
वृद्धावस्था में राम हरे राम राम राम
राम राम
जपो जागृत में राम देखो सपनों में राम
पाओ सुषुप्ति में राम हरे राम राम राम
राम राम
राम नाम की माला Ram Naam Ki Mala I VIJAY BAGI I New Ram Bhajan I Latest Full Audio Song
Ram Bhajan: Ram Naam Ki Mala
Singer: Vijay Bagi
Music Director: Ashish Kumar Verma
Lyricist: Sahay Sawariya
Album: Ram Naam Ki Mala
Project By: Ashish Kumar Verma
राम का नाम जीवन का हर रंग, हर क्षण, हर सांस में बस्ता है। पोथी में लिखो, तख्ती पर उकेरो, खंभे में देखो—हर जगह राम ही राम है। आँखों से उनकी छवि देखो, कानों से उनका नाम सुनो, और जिह्वा से उनका गुणगान करो। पानी में, भोजन में, हर कदम पर राम साथ हैं, जैसे साया कभी साथ न छोड़े।
बचपन की मासूमियत, जवानी की उमंग, और वृद्धावस्था की शांति—हर पड़ाव में राम का नाम संबल है। जागते वक्त जपो, सपनों में उनकी छवि पाओ, और गहरी नींद में भी उनका आलम रहे। यह नाम मन को बांधे रखता है, जैसे नदी किनारे को थामे रहती है। राम का जप जीवन को सरल, पवित्र और अर्थपूर्ण बनाता है। हर पल, हर जगह, बस राम को अपनाओ, क्योंकि वही सत्य है, वही सुख है।
पढ़ो पोथी में राम लिखो तख्ती पे राम,
देखो खम्बे में राम हरे राम राम राम,
राम राम राम राम राम ॐ,
राम राम राम राम राम ॐ,
राम राम राम राम राम राम,
राम राम राम राम राम राम,
राम राम राम राम हरे राम राम राम,
देखो आंखों से राम सुनो कानों से राम,
बोलो जिव्हा से राम हरे राम राम राम,
राम राम
पियो पानी में राम जीमो खाने में राम,
चलो घूमने में राम हरे राम राम राम,
राम राम,
बाल्यावस्था में राम युवावस्था में राम,
वृद्धावस्था में राम हरे राम राम राम,
राम राम,
जपो जागृत में राम देखो सपनों में राम,
पाओ सुषुप्ति में राम हरे राम राम राम,
राम राम,
रामचरितमानस पढ़ने के नियम क्या हैं ? Bageshwar Dham Sarkar | Sanskar TV | Divya Darbar
यह भाव उस प्रेमानुभूति का आह्वान है जहाँ ईश्वर किसी विशेष स्थान में नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षण में बसते हैं। जब ध्यान की दृष्टि खुलती है, तो ज्ञात होता है कि सांसों की गति से लेकर विचार की लय तक सबमें “राम” ही गूँजता है। बाल्य से वृद्धावस्था तक, जागरण से निद्रा तक, हर अवस्था में वही नाम सजीव रहता है — जैसे सृष्टि की नाड़ी उसी से धड़क रही हो। यह कोई सीमित जप नहीं; यह तो जीवन को दिव्यता की धुन में ढाल देना है। जब हर कर्म, हर स्पंदन ‘राम’ से जुड़ जाए, तब साधक अलग नहीं रहता — वह स्वयं राम के स्वर में बदल जाता है। यही अनन्य भक्ति है, जहाँ भेद मिट जाता है और नाम ही स्वरूप बन जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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