सुकून मिलता है जय जिनेन्द्र कहने से भजन
सुकून मिलता है जय जिनेन्द्र कहने से भजन
सुकून मिलता है जय जिनेन्द्र कहने से,
दुःख के बादल छट जाते है
जय जिनेन्द्र कहने से,
तन झूमने लगता है
जय जिनेन्द्र कहने से,
खुशियां मिलती है
जय जिनेन्द्र कहने से,
दर्द दूर हो जाता है
जय जिनेन्द्र कहने से,
सहारा मिलता है हारे को
जय जिनेन्द्र कहने से,
मंजिल मिल जाती है
जय जिनेन्द्र कहने से,
बड़ों का आशीर्वाद मिलता है
जय जिनेन्द्र कहने से,
मेरे महावीर के दर्शन मिल जाते है
जय जिनेन्द्र कहने से,
हँसते हुए आचार्य विद्या सागर नजर आते है
जय जिनेन्द्र कहने से,
दुःख के बादल छट जाते है
जय जिनेन्द्र कहने से,
तन झूमने लगता है
जय जिनेन्द्र कहने से,
खुशियां मिलती है
जय जिनेन्द्र कहने से,
दर्द दूर हो जाता है
जय जिनेन्द्र कहने से,
सहारा मिलता है हारे को
जय जिनेन्द्र कहने से,
मंजिल मिल जाती है
जय जिनेन्द्र कहने से,
बड़ों का आशीर्वाद मिलता है
जय जिनेन्द्र कहने से,
मेरे महावीर के दर्शन मिल जाते है
जय जिनेन्द्र कहने से,
हँसते हुए आचार्य विद्या सागर नजर आते है
जय जिनेन्द्र कहने से,
Jai Jinendra Bolo - Ravindra Jain New Bhajan |"जय जिनेन्द्र बोलो" Mahavir Bhajan | Audio Song
Sukoon Milata Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Duhkh Ke Baadal Chhat Jaate Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Tan Jhoomane Lagata Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Khushiyaan Milatee Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Dard Door Ho Jaata Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Sahaara Milata Hai Haare Ko
Jay Jinendr Kahane Se…
Manjil Mil Jaatee Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Badon Ka Aasheervaad Milata Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Mere Mahaaveer Ke Darshan Mil Jaate Hai
Jay Jinendr Kahane Se…
Hansate Hue Aachaary Vidya Saagar Najar Aate Hai
Jay Jinendr Kahane Se..!!
Album : Jai Jinendra Bolo
Singer : Ravindra Jain , Satish Dehra
Music : Ravindra Jain
Lyrics : Ravindra Jain
Music Lable : D.R. Productions
जय जिनेन्द्र का उच्चारण मन को ऐसी शांति देता है, मानो तपती धूप में ठंडी छांव मिल जाए। यह मात्र शब्द नहीं, आत्मा का सच्चा आलिंगन है, जो दुखों के काले बादलों को तुरंत छांट देता है। जैसे नाचता मोर वर्षा की बूंदों में आनंद पाता है, वैसे ही तन-मन इस जयकारे में झूम उठता है।
महावीर की यह वाणी हृदय में उतरती है, तो दर्द पिघल जाता है, जैसे बर्फ सूरज की किरणों में। हारा हुआ मन फिर से उठ खड़ा होता है, क्योंकि जिनेन्द्र का नाम सहारा है, मंजिल की राह दिखाने वाला। यह जयकारा बड़ों का आशीर्वाद बनकर आता है, जो जीवन को दिशा देता है।
संत की नजर में यह भक्ति वह दीप है, जो अंधेरे को चीर देता है। चिंतक कहता है, जय जिनेन्द्र का जाप जीवन को सरलता और सत्य से जोड़ता है, जैसे नदी अपने स्रोत से। धर्मगुरु सिखाते हैं, यह नाम जपने से महावीर का दर्शन होता है, आचार्य विद्यासागर की हंसी चित्त में बसती है, जो आत्मा को करुणा और ज्ञान से भर देती है।
जय जिनेन्द्र कहो, तो हर पल में खुशी बरसती है, और मन उनके चरणों में लीन हो जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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