मैं नीवीं मेरा सतगुरु ऊंचा भजन

मैं नीवीं मेरा सतगुरु ऊंचा भजन

मैं नीवीं मेरा सतगुरु ऊंचा, उचेया दे नाल लाई
मैं कमली मैंनूं इलम ना कोई, कदी ना गुरु नूं मनाया
की दस्सा ओसदी वडियाई, जिन कागो हंस बणाया
डोल रही सी नैया मेरी, उत्तो रात हनेरी
धन नी सैयो, सतगुरु मेरे, बांह पकड़ लई मेरी
वारी जावां नी मैं इनां चरणा तों, जिनां नीवेया नाल निभाई

Main Neeveen Mera Satgur Ucha

मन की नीचता और सतगुरु की महानता का संगम है, जहाँ आत्मा उनके ऊँचे प्रेम से जुड़ती है। नादान हृदय, जिसे ज्ञान की सुध नहीं, फिर भी गुरु की कृपा बिना मोल भाव के बरसती है। उनकी महिमा अनंत, जो काग-सी आत्मा को हंस बना दे। जीवन की डोलती नैया, जब अंधेरी रात में भटक रही थी, तब गुरु ने बांह थामकर पार लगाया। उनके चरणों में शीश झुकता है, जो नीच को भी अपने प्रेम में समेट लेते हैं। यह भक्ति का वह रास्ता है, जहाँ गुरु का सहारा हर तूफान से मुक्ति दिलाता है, और मन को सत्य की ओर ले जाता है।

'Main Neeveen Mera Satgur Ucha' mesmerizing Guru bhajan in Anandmurti Gurumaa's soulful voice. This Punjabi devotional bhajan has been taken from satsang which took place in Kullu, May 2012.

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