देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े भजन
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े भजन
देखा लखन का हाल तो, श्री राम रो पड़े,
अंगद सुग्रीव जामवंत, बलवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
लंका विजय की अब मुझे चाहत नहीं रही,
मुझमें धनुष उठाने की ताकत नहीं रही,
रघुवर के साथ धरती-आकाश रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
करने लगे विलाप श्री राम फूटकर,
क्या मैं जवाब दूँगा अयोध्या में लौटकर,
जितने थे मन में राम के अरमान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
सुग्रीव जामवंत सुनो ऐ अंगद बलवान,
लक्ष्मण नहीं बचा तो त्यज दूँगा मैं भी प्राण,
धरती पे पड़ा जो धनुष बाण रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
देखा जो जामवंत ने तो हनुमान उड़ गए,
सूर्योदय से पहले ही बूटी ले मुड़ गए,
गले लगा हनुमान को भगवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
देखा लखन का हाल तो, श्री राम रो पड़े,
अंगद सुग्रीव जामवंत, बलवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
अंगद सुग्रीव जामवंत, बलवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
लंका विजय की अब मुझे चाहत नहीं रही,
मुझमें धनुष उठाने की ताकत नहीं रही,
रघुवर के साथ धरती-आकाश रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
करने लगे विलाप श्री राम फूटकर,
क्या मैं जवाब दूँगा अयोध्या में लौटकर,
जितने थे मन में राम के अरमान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
सुग्रीव जामवंत सुनो ऐ अंगद बलवान,
लक्ष्मण नहीं बचा तो त्यज दूँगा मैं भी प्राण,
धरती पे पड़ा जो धनुष बाण रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
देखा जो जामवंत ने तो हनुमान उड़ गए,
सूर्योदय से पहले ही बूटी ले मुड़ गए,
गले लगा हनुमान को भगवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
देखा लखन का हाल तो, श्री राम रो पड़े,
अंगद सुग्रीव जामवंत, बलवान रो पड़े,
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े।
Dekha Lakhan Ka Haal To Shri Ram Ro Pade
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
लक्ष्मण के मूर्च्छित स्वरूप को निहारते ही श्रीराम का हृदय दर्द से भर उठता है, अंगद, सुग्रीव, जामवंत और बलवान सब भावविभोर हो जाते हैं। लंका की विजय के सारे उत्साह मिट जाते हैं, धनुष उठाने की शक्ति लुप्त हो जाती है, धरती-आकाश तक रो पड़ते हैं। राम मन में अयोध्या लौटने पर क्या जवाब देंगे, यह सोचकर विलाप करने लगते हैं और साथियों से कहते हैं कि लक्ष्मण न रहे तो प्राण भी त्याग देंगे। हनुमान सूर्योदय से पहले ही सुष्का बूटी लाने उड़ पड़ते हैं, राम उन्हें गले लगाकर आंसुओं से भीग जाते हैं।
श्रीराम भाईचारे, त्याग और करुणा के स्वरूप हैं, जो अपने प्रियजनों के दुख में स्वयं को भुला देते हैं। लक्ष्मण उनके अंगभूत सखा हैं, जिनके बिना जीवन अधूरा सा लगता है, इसलिए हर संकट में वे सबसे पहले उनके दुख को अपना बना लेते हैं। हनुमान, सुग्रीव जैसे भक्तों का प्रेम और तत्परता उनकी कृपा का प्रमाण है, जो असंभव कार्य को भी संभव बना देती है। राम का यह वात्सल्य साधक को सिखाता है कि सच्चा स्वामी कभी अकेला नहीं छोड़ता, और भक्ति में सब कुछ लुटाने पर भी जीवन सार्थक हो जाता है।
श्रीराम भाईचारे, त्याग और करुणा के स्वरूप हैं, जो अपने प्रियजनों के दुख में स्वयं को भुला देते हैं। लक्ष्मण उनके अंगभूत सखा हैं, जिनके बिना जीवन अधूरा सा लगता है, इसलिए हर संकट में वे सबसे पहले उनके दुख को अपना बना लेते हैं। हनुमान, सुग्रीव जैसे भक्तों का प्रेम और तत्परता उनकी कृपा का प्रमाण है, जो असंभव कार्य को भी संभव बना देती है। राम का यह वात्सल्य साधक को सिखाता है कि सच्चा स्वामी कभी अकेला नहीं छोड़ता, और भक्ति में सब कुछ लुटाने पर भी जीवन सार्थक हो जाता है।
यह भजन भी देखिये
|
Author - Saroj Jangir
इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर कृष्णा भजन, जन्माष्टमी भजन, भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल/Lyrics उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें। |
