ओ जी ओ गिरधारी नटवर भजन

ओ जी ओ गिरधारी भजन

ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,
थारी नानी बाई को भात भरण ने आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,

थारे ही भरोसे आयो सेठ सांवरा,
महारी आज सभा में लाज बचावण आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,
दीनानाथ दयालु थारो नाम हे,
महारी अटकी नया पर लगावण आओजी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,

नरसी भगत न तो थारो आसरो,
महारी आज सभा में मान बढ़ावन आ ओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,

ऊबी बाई जोवे थारी बाटड़लि,
थारी नानी बाई ने चुनड़ी उड़ावन आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,

ताराचंद भी सांवरा थारी आश करे
थारे भगता री लाज बचावण जी आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,
 
नरसी मेहता कृष्ण को अपना आराध्य देव मानते हैं और वह उन्हें अपना सब कुछ मानते हैं। वह कृष्ण से अपनी नानी बाई की मदद करने के लिए कहते हैं क्योंकि वह उन्हें अपने परिवार का पालन-पोषण करने में मदद करना चाहते हैं। यह भजन हमें बताता है कि एक भक्त अपने आराध्य देव से अपने लिए और दूसरों के लिए मदद मांग सकता है। इस भजन में, एक भक्त कृष्ण से अपनी नानी बाई की मदद करने के लिए कहते हैं। उनकी नानी बाई एक गरीब महिला हैं और उनके पास अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है। भक्त कृष्ण से अपनी नानी बाई को भोजन प्रदान करने, उनके आट को चलाने में मदद करने, उनकी सभा में मान बढ़ाने और उनकी नानी बाई की चुनरी उड़ाने के लिए कहते हैं। भक्त कृष्ण से अपने भक्तों की लाज बचाने के लिए भी कहते हैं।

भक्त अपने आराध्य देव से अपने लिए और दूसरों के लिए मदद मांग सकता है। भक्त कृष्ण की दयालुता और कृपा पर भरोसा करते हैं और वह उन्हें अपने परिवार और दोस्तों की मदद करने के लिए कहते हैं।

ओ जी ओ गिरधारी भजन O Ji O Girdhari Natwar Nagariya Bhajan Nath Ji Bhajan

  ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,
थारी नानी बाई को भात भरण ने आओ जी सांवरा
ओ जी ओ.....

थारे ही भरोसे आयो सेठ सांवरा,
महारी आज सभा में लाज बचावण आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी .....

दीनानाथ दयालु थारो नाम हे,
महारी अटकी नया पर लगावण आओजी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी.......

नरसी  भगत न तो थारो आसरो,
महारी आज सभा में मान बढ़ावन आ ओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी.....

ऊबी बाई जोवे थारी बाटड़लि,
थारी नानी बाई ने चुनड़ी उड़ावन आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी.....

ताराचंद भी सांवरा थारी आश करे
थारे भगता री लाज बचावण जी आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी....

ओ जी ओ गिरधारी नटवर नागरिया,
थारी नानी बाई को भात भरण ने आओ जी सांवरा
ओ जी ओ.....

थारे ही भरोसे आयो सेठ सांवरा,
महारी आज सभा में लाज बचावण आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी .....

दीनानाथ दयालु थारो नाम हे,
महारी अटकी नया पर लगावण आओजी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी.......

नरसी  भगत न तो थारो आसरो,
महारी आज सभा में मान बढ़ावन आ ओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी.....

ऊबी बाई जोवे थारी बाटड़लि,
थारी नानी बाई ने चुनड़ी उड़ावन आओ जी सांवरा
ओ जी ओ गिरधारी.....

ताराचंद भी सांवरा थारी आश करे
थारे भगता री लाज बचावण जी आओ जी सांवरा

ओ जी ओ गिरधारी....
।। राग गौड़ी।।
राम गुसईआ जीअ के जीवना।
मोहि न बिसारहु मै जनु तेरा।। टेक।।
मेरी संगति पोच सोच दिनु राती। मेरा करमु कटिलता जनमु कुभांति।।१।।
मेरी हरहु बिपति जन करहु सुभाई। चरण न छाडउ सरीर कल जाई।।२।।
कहु रविदास परउ तेरी साभा। बेगि मिलहु जन करि न बिलंबा।।३।। 
 
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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