ब्रज रस हरि रस बैठक कृष्ण भजन
ब्रज रस हरि रस बैठक कृष्ण भजन
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे।
मैं तेरे सिर सिरहाना बन जाऊं,
तू राधा मैं कान्हा बन जाऊं,
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊं,
तेरा दीवाना बन जाऊं,
राधे तेरा दीवाना बन जाऊं।
रखा ही क्या है तेरे मेरे शहरों में,
वृंदावन चल सखी कृष्ण के पैरों में,
वो ही नदी, वो ही दरिया,
वो स्वर्गों का जरिया,
ये उसकी ही माया है,
रातों के तारे सारे,
ये पानी के किनारे,
वो चांद लेके आया है,
तेरी भूख में खाना बन जाऊं,
तू शमा मैं परवाना बन जाऊं,
तू राधा मैं कान्हा बन जाऊं,
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊं,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे।
जय जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारे राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारे राधा रमण हरि बोल।
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्यामा श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्यामा श्याम सुंदर राधे।
जय जय राधे, जय जय श्याम,
जय जय श्री वृंदावन धाम,
जय जय राधे, जय जय श्याम,
जय जय श्री वृंदावन धाम,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्यामा श्याम सुंदर राधे।
श्यामा प्यारी कुंज बिहारी,
जय जय श्री हरिदास दुलारी,
श्यामा प्यारी कुंज बिहारी,
जय जय श्री हरिदास दुलारी।
मन भूल मत जाइयो,
राधा रानी के चरण,
राधा रानी के चरण,
महारानी के चरण,
मन भूल मत जाइयो,
राधा रानी के चरण।
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
मन भूल मत जाइयो,
राधा रानी के चरण।
यशोदा नंदन लाल की, जय हो,
बांके बिहारी लाल की, जय हो,
राधावल्लभ लाल की, जय हो,
राधा रमण जू लाल की, जय हो,
वृषभानु की किशोरी की, जय हो,
वृषभानु के जमाई की, जय हो,
वृंदावन धाम की, जय हो,
बरसाना धाम की, जय हो।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेव,
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेव।
तुझसे ही धरती है,
तुझसे ही अंबर है,
तेरे इस रूप से ही,
रोशन संसार है,
मुझको भी अपना बना ले,
अपने नैनों में बसा ले,
रंग रंग जाऊं तेरे रंग में,
अब कोई ना मेरे संग में,
मेरा हाथ थाम ले,
तू संभाल ले,
ओ जग के पालनहारे,
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेव।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे,
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे।
मैं तेरे सिर सिरहाना बन जाऊं,
तू राधा मैं कान्हा बन जाऊं,
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊं,
तेरा दीवाना बन जाऊं,
राधे तेरा दीवाना बन जाऊं।
रखा ही क्या है तेरे मेरे शहरों में,
वृंदावन चल सखी कृष्ण के पैरों में,
वो ही नदी, वो ही दरिया,
वो स्वर्गों का जरिया,
ये उसकी ही माया है,
रातों के तारे सारे,
ये पानी के किनारे,
वो चांद लेके आया है,
तेरी भूख में खाना बन जाऊं,
तू शमा मैं परवाना बन जाऊं,
तू राधा मैं कान्हा बन जाऊं,
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊं,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे,
राधे राधे गोविन्द राधे, राधे।
जय जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारे राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारे राधा रमण हरि बोल।
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्यामा श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्यामा श्याम सुंदर राधे।
जय जय राधे, जय जय श्याम,
जय जय श्री वृंदावन धाम,
जय जय राधे, जय जय श्याम,
जय जय श्री वृंदावन धाम,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्याम सुंदर श्याम सुंदर राधे,
श्यामा श्याम सुंदर राधे।
श्यामा प्यारी कुंज बिहारी,
जय जय श्री हरिदास दुलारी,
श्यामा प्यारी कुंज बिहारी,
जय जय श्री हरिदास दुलारी।
मन भूल मत जाइयो,
राधा रानी के चरण,
राधा रानी के चरण,
महारानी के चरण,
मन भूल मत जाइयो,
राधा रानी के चरण।
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,
मन भूल मत जाइयो,
राधा रानी के चरण।
यशोदा नंदन लाल की, जय हो,
बांके बिहारी लाल की, जय हो,
राधावल्लभ लाल की, जय हो,
राधा रमण जू लाल की, जय हो,
वृषभानु की किशोरी की, जय हो,
वृषभानु के जमाई की, जय हो,
वृंदावन धाम की, जय हो,
बरसाना धाम की, जय हो।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेव,
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेव।
तुझसे ही धरती है,
तुझसे ही अंबर है,
तेरे इस रूप से ही,
रोशन संसार है,
मुझको भी अपना बना ले,
अपने नैनों में बसा ले,
रंग रंग जाऊं तेरे रंग में,
अब कोई ना मेरे संग में,
मेरा हाथ थाम ले,
तू संभाल ले,
ओ जग के पालनहारे,
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेव।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे,
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।
Braj Ras (Official Video) | Hari Ras Baithak | B Praak | Jaani | Kripa Record
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Singer - B Praak
Composition - B Praak and Traditional
Lyrics - Jaani and Traditonal
Music - B Praak and Mir Desai
Video - Prateek Thakur
Composition - B Praak and Traditional
Lyrics - Jaani and Traditonal
Music - B Praak and Mir Desai
Video - Prateek Thakur
जब राधे‑राधे और गोविन्द‑राधे गूँजते हैं, तो लगता है मानो दिल का हर रंग उन्हीं के नाम से भर गया हो। टुकड़े‑टुकड़े जीवन की जगह यह भाव बचता है कि तू राधा, मैं कान्हा, तू दीवानी, मैं दीवाना – सब अलग‑अलग घरों, शहरों की बात कहाँ रहती है, जब दोनों का घर तो वृंदावन ही हैं। मन यही चाहता है कि राधा के पास ही सिरहाना बन जाऊँ, रातों के तारों जैसा भोजन अपने प्रेम से बन जाऊँ, और वही शमा और परवाना की तरह जलते‑जलते उसके नाम में पूरे हो जाएँ।
यशोदा‑नंद के लाल, बाँके बिहारी, राधावल्लभ और राधारमण – हर नाम के पीछे वही एक तिरंगा रंग छुपा है, जो धरती, अंबर और संसार को रोशन करता है। चाहे कोई तारा कहे या पानी का किनारा, हर जगह उन्हीं की माया महसूस होती है। इस भाव में मन कहता है कि उसे भी अपने नैनों में बसा लें, उसका हाथ थाम लें, और उसे अपने रंग में रंग लें, ताकि कोई और संग में न रहे, केवल श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ही जीवन का एकमात्र आधार बन जाएँ। हरे कृष्ण–हरे राम की धुन तो बस यही सिखाती रहती है कि जब तक हरिनाम जीवन की धड़कन बना रहे, तब तक राधा‑कान्हा की यह दीवानगी कहीं नहीं टूटती।
यशोदा‑नंद के लाल, बाँके बिहारी, राधावल्लभ और राधारमण – हर नाम के पीछे वही एक तिरंगा रंग छुपा है, जो धरती, अंबर और संसार को रोशन करता है। चाहे कोई तारा कहे या पानी का किनारा, हर जगह उन्हीं की माया महसूस होती है। इस भाव में मन कहता है कि उसे भी अपने नैनों में बसा लें, उसका हाथ थाम लें, और उसे अपने रंग में रंग लें, ताकि कोई और संग में न रहे, केवल श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ही जीवन का एकमात्र आधार बन जाएँ। हरे कृष्ण–हरे राम की धुन तो बस यही सिखाती रहती है कि जब तक हरिनाम जीवन की धड़कन बना रहे, तब तक राधा‑कान्हा की यह दीवानगी कहीं नहीं टूटती।
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