बाजरे की रोटी खाले श्याम चूरमां भजन

बाजरे की रोटी खाले श्याम चूरमां ने भूल जावेलो

बाजरे की रोटी खाले श्याम,
चूरमां ने भूल जावेलो।
बाजरे की रोटी खाले श्याम,
चूरमां ने भूल जावेलो।

जाटणी के हाथ की,
बणी रे कमाल की,
सागे लाई हाँडी फिर,
खड़ी और दाल की
गुड़ मीठों मीठों लाई श्याम,
के चुरमा ने भूल जावेलो,
बाजरे की रोटी खाले श्याम,
चूरमां ने भूल जावेलो।

बाजरों ऐसो है बाबा,
ठंड नही लागे,
दस बीस कोस बाबा,
खायी के तू भागे,
गोडा में आवेगी थारे जान,
के चुरमा ने भूल जावेलो,
बाजरे की रोटी खाले श्याम,
चूरमां ने भूल जावेलो।

बाजरे की रोटी सागे,
छाछ का सबडका,
खाए के मारेला,
तू मूँछ पे रगड़का,
के चुरमा ने भूल जावेलो,
बाजरे की रोटी खाले श्याम,
चूरमां ने भूल जावेलो।

बनवारी रोटी ऐसो,
ढूंडतो रवेगो,
हरियाणे तक मेरो,
पुछतो रवेगो,
पुछतो रवेगो म्हारो नाम,
के चुरमा ने भूल जावेलो,
बाजरे की रोटी खाले श्याम,
चूरमां ने भूल जावेलो।

 
Bajare Ki Roti Khale Shyam *Latest Shyam Bhajan* By Jai Shankar Choudhury
 
सुंदर भजन में एक जाटणी की श्रीकृष्णजी के प्रति सादगी भरी भक्ति और उनके लिए प्यार से बनाए भोजन का न्योता है। यह ऐसा है, जैसे कोई गाँव की बेटी अपने प्रिय श्याम को अपने हाथ का बना खाना खिलाने को बेकरार हो। बाजरे की रोटी, दाल, खड़ी, और गुड़ का चूरमा उस देसी मिठास और प्रेम को दर्शाता है, जो जाटणी अपने श्याम के लिए लाई है, जैसे कोई अपने मेहमान के लिए दिल से खाना तैयार करे।

जाटणी के हाथ की रोटी का कमाल और छाछ का स्वाद श्रीकृष्णजी को इस कदर रिझाता है कि चूरमा भी भूल जाएँ, यह भाव उस प्रेम भरी ठिठोली को दिखाता है, जैसे कोई अपने प्रिय से मजाक में कहे, “मेरे खाने का स्वाद ऐसा है कि बाकी सब भूल जाओ।” बाजरे की ताकत का जिक्र, जो ठंड भगाए और कोसों तक भागने की शक्ति दे, उस देहाती जीवन की सादगी और ताकत को उजागर करता है।
 
Singer: Jai Shankar Choudhury
 
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