भोले के चरणों में ध्यान अपना लगाले
भोले के चरणों में ध्यान अपना लगाले
भोले के चरणों में ध्यान अपना लगा ले,सुखदाई है ये नाम जप रे मन रात दिन,
बोलो बम बम बोलो हर हर बम बम बोलो।।
अंग भभूति रमाये है,माथे पे चंदा सुहाए है,
गंगा जटाओ में समाये है, विषधर गले में लिपटाये है,
भोले के चरणों में ध्यान अपना लगा ले
कोई उनको अविनाशी कहता है,
कोई भोले ही भोले जपता है,
मान जाये बस थोड़ी भक्ति से,
भोले भक्तो के अंग संग रहता है,
भोले के चरणों में,ध्यान अपना लगा ले
नाम भोले का जो भी गायेगा,
बिगड़ी पल में बाबा बनाएगा,
सुनते है सबकी विनती भोले जी,
नैया तो भव से पार लगाएगा,
भोले के चरणों में,ध्यान अपना लगा ले,
भोले का डमरू डम डम डम बोले,
ओढ़े बाघंबर खाये भंग गोले,
तू भी ‘सरल’ भोले का होले,
‘लख्खा’ जीवन में ना डोले,
भोले के चरणों में,ध्यान अपना लगा ले
सुंदर भजन में शिव की भक्ति और उनके चरणों में आत्मसमर्पण का भाव गहन रूप से प्रकट हुआ है। इसमें यह संदेश निहित है कि भोलेनाथ के नाम का सच्चे मन से जाप करने से भक्त के समस्त कष्ट दूर हो सकते हैं और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।
शिव का दिव्य स्वरूप उनकी भभूत से शोभित होता है, माथे पर चंद्रमा और गले में विषधर लिपटा हुआ है—यह उनके अलौकिक व्यक्तित्व का प्रतीक है। उनकी भक्ति में डूबा हुआ मन श्रद्धा से भर जाता है, जिससे व्यक्ति सांसारिक मोह से मुक्त होकर शिव की कृपा प्राप्त करता है।
शिव भक्तों के सच्चे साथी हैं, जो अपने भक्ति से उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। उनके नाम का जाप करने से बिगड़े हुए कार्य भी पूर्ण हो सकते हैं और जीवन की कठिनाइयाँ समाप्त हो सकती हैं। शिव की भक्ति मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है और जीव को भवसागर से पार लगाने वाली होती है।