मेरे प्यारे गुरुवर तेरी मुझपे नज़र
मेरे प्यारे गुरुवर तेरी मुझपे नज़र
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
देखते ही तुझे, मिल गया सब मुझे ॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
देखते ही तुझे, मिल गया सब मुझे॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
मैं परेशा था, मेरे कोई न था ॥
ऐसे में हाथ तूने जो पकड़ा मेरा ॥
गर्दिशे मिट गयी, मंजिले मिल गयी ॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया. ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया. ॥
तुम जहाँ भी रहो, साथ में भी रहूं॥
थामे रखना, गुरुवर मेरा हाथ रे ॥
ओ गुरुदेव.......गुरुदेव.......गुरुदेव
तुम जहाँ भी रहो, साथ में भी रहूं ॥
थामे रखना, गुरुवर मेरा हाथ रे ॥
भूल होजाये अगर, फेरना न नज़र ॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
मेरे मन मोहना, माया का मोहना ॥
मैं ही जन्मोजन्म, बस तुम्हारा रहूं ॥
मेरी ये प्रार्थना, है ये आराधना ॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र ॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
देखते ही तुझे, मिल गया सब मुझे ॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया ॥
मेरे प्यारे गुरुवार, तेरी मुझपे नज़र॥
ख्वाब देखा जो पूरा मेरा होगया ॥
देखते ही तुझे, मिल गया सब मुझे॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया.॥
मैं तेरा होगया, तू मेरा होगया....
सुन्दर भजन में गुरुवर के प्रति अपार श्रद्धा और समर्पण का भाव प्रकट होता है। यह भक्ति केवल ज्ञान की प्राप्ति तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण समर्पण और गुरु की कृपा से जीवन के समस्त अंधकार को दूर करने की विनम्र प्रार्थना भी है। जब गुरुवर की कृपा होती है, तब सभी समस्याएँ मिट जाती हैं, और भक्त का जीवन प्रकाशमय हो जाता है।
भजन में स्पष्ट होता है कि गुरु केवल मार्गदर्शन ही नहीं करते, बल्कि जीवन की हर कठिनाई में संबल भी बनते हैं। जब भक्त अपने अस्तित्व को गुरुचरणों में अर्पित करता है, तब उसे सच्ची शांति और दिशा प्राप्त होती है। यह भजन आत्मा की पुकार है—जहाँ भक्त हर जन्म में गुरु के चरणों में स्थान चाहता है, ताकि उसकी आत्मा सदा उनके मार्गदर्शन में आगे बढ़ती रहे।
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