मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी भजन
राणीसती राणा ने कह रही जी
लेज्या राणा भस्मी और घोड़ी तेरे साथ
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
1..दिन छिपणा से पहल्यां ना रुकीजै
सही ठीकाणे रुक ज्यावेगी घोड़ी अपने आप..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
2.. दुनिया सारी थानै रोकसी जी
पण तू निर्भय रहजे राणा मैं हूं तेरे साथ..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
3.. कोई भी मूरति मेरी ना बणा ज्यो
करसूं में त्रिशूल में बैठी सबकी नैया पार..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
4.. भादी मावस को मेळो लागसी जी
जात जड़ूला करबा आसी लाखां ही नर नार..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
5.. चुनड़ी उढ़ा कर झोळी जो मांडसी जी
करस्यूँ मंगल अम्बरीष कोनी भेजूं खाली हाथ..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
लेज्या राणा भस्मी और घोड़ी तेरे साथ
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
1..दिन छिपणा से पहल्यां ना रुकीजै
सही ठीकाणे रुक ज्यावेगी घोड़ी अपने आप..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
2.. दुनिया सारी थानै रोकसी जी
पण तू निर्भय रहजे राणा मैं हूं तेरे साथ..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
3.. कोई भी मूरति मेरी ना बणा ज्यो
करसूं में त्रिशूल में बैठी सबकी नैया पार..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
4.. भादी मावस को मेळो लागसी जी
जात जड़ूला करबा आसी लाखां ही नर नार..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
5.. चुनड़ी उढ़ा कर झोळी जो मांडसी जी
करस्यूँ मंगल अम्बरीष कोनी भेजूं खाली हाथ..
मंदिर बाणसी मेरो जोर को जी
राणीसती राणा ने कह रही जी लेज्या राणा भस्मी और घोड़ी तेरे साथ मंदिर बणसी मेरो जोर को जी #Ambrish
#AmbrishKumarMumbai
#9327754497
#अम्बरीष_कुमार_मुंबई
#अम्बरीष_भैया_भजन
#सम्बलपुर लाइव 1 दिसम्बर 2024
विशेष धन्यवाद : #तुलस्यान परिवार
#9327754497
#अम्बरीष_कुमार_मुंबई
#अम्बरीष_भैया_भजन
#सम्बलपुर लाइव 1 दिसम्बर 2024
विशेष धन्यवाद : #तुलस्यान परिवार
राणीसती माँ की वो पुकार दिल को छू जाती है, जैसे कोई माँ अपने बेटे को रास्ते पर चलते हुए सारी बातें समझा रही हो। दिन ढलने से पहले रुकना नहीं, घोड़ी खुद ही सही ठिकाने पर थम जाएगी। दुनिया कितनी भी रोकने की कोशिश करे, निर्भय रहना, क्योंकि माँ खुद साथ चल रही है, हर कदम पर छाया बनकर।
मूर्ति बनाने की ज़रूरत नहीं, त्रिशूल में विराजमान होकर वो सबकी नैया पार करा देती हैं। भादवा मास की अमावस्या को जब मेला लगता है, लाखों नर-नारी जत्थे बनाकर आते हैं, चुनड़ी ओढ़कर झोली माँगते हैं, तो माँ अम्बरीष के मंगल से भी ज्यादा कुछ न देकर नहीं छोड़तीं। खाली हाथ कोई नहीं लौटता, क्योंकि उनकी मेहर इतनी गहरी है कि जो भी आता है, वो भरकर जाता है – प्रेम से, सुरक्षा से, और वो विश्वास जो कभी नहीं डगमगाता।
