तेरा खाटू धाम मिलेगा देख ले भजन
तेरा खाटू धाम मिलेगा देख ले भजन
तेरा खाटू धाम मिलेगा देख ले,भक्तों का चीर के कलेजा देख ले,
तेरे जैसा श्याम मिले गा देख ले,
भक्तों का चीर के कलेजा देख ले।
खाटू धाम दिल में समाया हुआ है,
तुझे श्याम दिल में बसाया हुआ है,
बैठा मोर छड़ी को धाम मिलेगा देखले,
भक्तों का चीर के कलेजा देख ले।
रोज रोज तेरा दरबार देखता,
सोहना सोहना तेरा शृंगार देखता,
पकड़े नीले की लगाम मिले गा देखले,
भक्तों का चीर के कलेजा देख ले।
फागण का नज़ारा दिल में घूम रहा है,
आत्मा में जय जय कारा गूंज रहा है,
लहराता निशान मिलेगा देख ले,
भक्तों का चीर के कलेजा देख ले।
हमें तेरा जब से दीदार हुआ है,
जान से भी ज्यादा तुमसे प्यार हुआ है,
लिखा तेरा नाम मिलेगा देखले,
भक्तों का चीर के कलेजा देख ले।
बनवारी कहता ये दीवाना मेरे श्याम,
दिल से कही निकल नहीं जाना मेरे श्याम,
वरना मेरी जाएगी ये जान देखले,
भक्तों का चीर के कलेजा देख ले।
यह सुन्दर भजन सच्ची भक्ति, आत्मिक जुड़ाव और परम प्रेम के भाव को प्रदर्शित करता है। जब भक्त श्रीश्यामजी की कृपा में डूब जाता है, तब उसका अंतःकरण प्रेम और समर्पण के प्रकाश से आलोकित हो उठता है। यह अनुभूति केवल बाह्य तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और आत्मा के परम धाम की ओर बढ़ने की यात्रा है।
खाटू का धाम केवल एक स्थान नहीं, यह हृदय में गूंजने वाली वह आस्था है, जहां प्रभु की उपस्थिति हर क्षण अनुभव होती है। जब कोई श्रद्धा में पूर्ण रूप से समर्पित होता है, तब वह श्यामजी को अपने भीतर बसाए रखता है—यह भाव ही जीवन को दिव्यता से भर देता है।
दरबार के दर्शन, श्रृंगार का अनुपम सौंदर्य और नीले रंग की लगाम की अनुभूति—all यह प्रेम की ऊँचाई को दर्शाते हैं। जब भक्त इस प्रेम में रम जाता है, तब उसकी साधना केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संपूर्ण जीवन इसी भाव की अभिव्यक्ति बन जाता है।
फागण का उल्लास, जयकारों का दिव्य गान, और निशान का लहराना इस आस्था की गहराई को और भी जीवंत कर देता है। जब यह अनुभूति आत्मा में बस जाती है, तब संसार की समस्त बाधाएँ छोटी प्रतीत होने लगती हैं—क्योंकि ईश्वर की कृपा सबकुछ सहज बना देती है।
यह भाव बताता है कि जब किसी को परम प्रेम का साक्षात्कार हो जाता है, तब वह अपनी समस्त पहचान को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। यही सच्चा आनंद है—जहां प्रेम, भक्ति और विश्वास एक-दूसरे में विलीन हो जाते हैं और जीवन केवल प्रभु के प्रति समर्पण का पावन गान बन जाता है।
खाटू का धाम केवल एक स्थान नहीं, यह हृदय में गूंजने वाली वह आस्था है, जहां प्रभु की उपस्थिति हर क्षण अनुभव होती है। जब कोई श्रद्धा में पूर्ण रूप से समर्पित होता है, तब वह श्यामजी को अपने भीतर बसाए रखता है—यह भाव ही जीवन को दिव्यता से भर देता है।
दरबार के दर्शन, श्रृंगार का अनुपम सौंदर्य और नीले रंग की लगाम की अनुभूति—all यह प्रेम की ऊँचाई को दर्शाते हैं। जब भक्त इस प्रेम में रम जाता है, तब उसकी साधना केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संपूर्ण जीवन इसी भाव की अभिव्यक्ति बन जाता है।
फागण का उल्लास, जयकारों का दिव्य गान, और निशान का लहराना इस आस्था की गहराई को और भी जीवंत कर देता है। जब यह अनुभूति आत्मा में बस जाती है, तब संसार की समस्त बाधाएँ छोटी प्रतीत होने लगती हैं—क्योंकि ईश्वर की कृपा सबकुछ सहज बना देती है।
यह भाव बताता है कि जब किसी को परम प्रेम का साक्षात्कार हो जाता है, तब वह अपनी समस्त पहचान को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। यही सच्चा आनंद है—जहां प्रेम, भक्ति और विश्वास एक-दूसरे में विलीन हो जाते हैं और जीवन केवल प्रभु के प्रति समर्पण का पावन गान बन जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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