भगवान जगदीश्वर की आरती लिरिक्स
भगवान जगदीश्वर की आरती, सृष्टि के पालनकर्ता और संपूर्ण जगत के स्वामी के प्रति हमारी गहन भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। आरती के दौरान जब "जय जगदीश हरे" का मधुर स्वर गूंजता है, तो भक्तों के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम और आभार की भावना उमड़ पड़ती है। भगवान जगदीश्वर, जो सभी प्राणियों के रक्षक और मार्गदर्शक हैं, उनकी आरती हमें यह सिखाती है कि सच्ची शांति और सुख केवल उनके चरणों में ही प्राप्त होती है। यह आरती मन को शुद्ध करती है, आत्मा को जागृत करती है और हमारे जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करती है।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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Author - Saroj Jangir
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