मैं जीत नही मांगू मुझे हार दे देना लिरिक्स
मैं जीत नही मांगू मुझे हार दे देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।
अक़्सर देखा मैंने जब तूफ़ान आता है,
तेरे सेवक का बाबा मनवा घबराता है,
रो रो के कहता है मुझे पार कर देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।
मंझधार में हो बेटा तू देख ना पाता है,
लेके हाथ में हाथ उसे पार लगाता है,
तेरा काम है हारी हुई बाजी को बदल देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।
नैया को किनारे कर उसे छोड़ जाता तू,
रहता वो किनारे पे वापिस नही आता तू,
मस्ती में वो रहता फिर क्या लेना देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।
मझदार में हम दोनों एक साथ साथ होंगे,
कहता है श्याम तेरा हाथो में हाथ होंगे,
ना किनारे हो नैया मुझको वो दर देना
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।
भजन कीर्तन के लिए आवश्यक भाव भक्ति और समर्पण है। भजन कीर्तन एक ऐसा अभ्यास है जिसमें हम ईश्वर या किसी अन्य आध्यात्मिक शक्ति के प्रति अपना प्रेम और समर्पण व्यक्त करते हैं। जब हम भजन कीर्तन करते हैं, तो हम अपने मन को वर्तमान क्षण में लाते हैं और अपने विचारों और भावनाओं को ईश्वर पर केंद्रित करते हैं। हम ईश्वर के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त करने के लिए अपने शब्दों, संगीत और भावनाओं का उपयोग करते हैं।
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