मैं जीत नही मांगू मुझे हार दे देना भजन

मैं जीत नही मांगू मुझे हार दे देना भजन

मैं जीत नही मांगू मुझे हार दे देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।

अक़्सर देखा मैंने जब तूफ़ान आता है,
तेरे सेवक का बाबा मनवा घबराता है,
रो रो के कहता है मुझे पार कर देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।

मंझधार में हो बेटा तू देख ना पाता है,
लेके हाथ में हाथ उसे पार लगाता है,
तेरा काम है हारी हुई बाजी को बदल देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।

नैया को किनारे कर उसे छोड़ जाता तू,
रहता वो किनारे पे वापिस नही आता तू,
मस्ती में वो रहता फिर क्या लेना देना,
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना।

मझदार में हम दोनों एक साथ साथ होंगे,
कहता है श्याम तेरा हाथो में हाथ होंगे,
ना किनारे हो नैया मुझको वो दर देना
क्या करूँ किनारे का, मजधार दे देना। 

Jay Shri Shyam !! मैं जीत नहीं मांगू !! Shyam Baba Devotional Bhajan !! Shyam Aggarwal

भजन कीर्तन के लिए आवश्यक भाव भक्ति और समर्पण है। भजन कीर्तन एक ऐसा अभ्यास है जिसमें हम ईश्वर या किसी अन्य आध्यात्मिक शक्ति के प्रति अपना प्रेम और समर्पण व्यक्त करते हैं। जब हम भजन कीर्तन करते हैं, तो हम अपने मन को वर्तमान क्षण में लाते हैं और अपने विचारों और भावनाओं को ईश्वर पर केंद्रित करते हैं। हम ईश्वर के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त करने के लिए अपने शब्दों, संगीत और भावनाओं का उपयोग करते हैं।

जब दिल मानता है कि जीत नहीं, बल्कि हार ही सच्ची जीत है, तो वह खुद ही मँझधार माँगने लगता है। किनारे की सुरक्षित जगह के बजाय वह यही चाहता है कि भगवान उसे समुद्री तूफ़ान के बीच ले जाएँ, जहाँ डगर दिखाई न देती हो, पर वहीं उनका हाथ उसके हाथ में टिका रहे। ऐसा लगता है मानो जीवन की सबसे बड़ी कामयाबी नाव को सुरक्षित घाट पर छोड़ना नहीं, बल्कि उसे हर लहर के साथ मिलकर आगे बढ़ना है।

तूफ़ान आता है तो सेवक का मन घबरा जाता है, लेकिन फिर भी वह उसी मुश्किल में छिपा उद्धार देखता है। मँझधार में घिरा बच्चा अपने पिता के हाथों में हाथ लेकर जमीन तक पहुँचता है, इसी तरह भगवान वही काम करते हैं जो हारी हुई बाज़ी को फिर से जीत की ओर मोड़ देते हैं। जब नैया किनारे लग जाती है और वहाँ ही रह जाती है, तो वह सिर्फ़ सुरक्षा की कहानी बन जाती है, लेकिन भगवान से तो यही मांग है कि उसे ऐसी डगर दिखाएँ जो न किनारे पर ठहरे, न अकेले तैरने की हो।

अब यह भाव उठता है कि श्याम वही मार्ग दिखाएँ जहाँ मिल‑जुलकर दोनों एक साथ मँझधार की लहरों को पार करें, हाथ में हाथ लिए बिना किनारे की चिंता, बिना नैया की बेड़ियाँ। जब दिल यह मान लेता है कि डूबना भी उनके साथ सुकून है, तब मँझधार खुद‑से सुरक्षा बन जाती है।
 

➤Song Name: मैं जीत नहीं मांगू
➤Singer & Lyrics : Shyam Aggarwal
➤Copyright: Shree Cassette Industries (SCI)
Watch “मैं जीत नहीं मांगू” From Shree Cassette Industries 

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