ललिता 108 नाम नामावली अर्थ महत्त्व
ललिता 108 नाम नामावली जानिये अर्थ और महत्त्व
- ॐ रजताचल शृंगाग्र मध्यस्थायै नमः
- ॐ हिमाचल महावंश पावनायै नमः
- ॐ शंकरार्धांग सौंदर्य शरीरायै नमः
- ॐ लसन्मरकत स्वच्च विग्रहायै नमः
- ॐ महातिशय सौंदर्य लावण्यायै नमः
- ॐ शशांकशेखर प्राणवल्लभायै नमः
- ॐ सदा पंचदशात्मैक्य स्वरूपायै नमः
- ॐ वज्रमाणिक्य कटक किरीटायै नमः
- ॐ कस्तूरी तिलकोल्लासित निटलायै नमः
- ॐ भस्मरेखांकित लसन्मस्तकायै नमः ॥ १० ॥
- ॐ विकचांभोरुहदल लोचनायै नमः
- ॐ शरच्चांपेय पुष्पाभ नासिकायै नमः
- ॐ लसत्कांचन ताटंक युगलायै नमः
- ॐ मणिदर्पण संकाश कपोलायै नमः
- ॐ तांबूलपूरितस्मेर वदनायै नमः
- ॐ सुपक्वदाडिमीबीज वदनायै नमः
- ॐ कंबुपूग समच्छाय कंधरायै नमः
- ॐ स्थूलमुक्ताफलोदार सुहारायै नमः
- ॐ गिरीशबद्दमांगल्य मंगलायै नमः
- ॐ पद्मपाशांकुश लसत्कराब्जायै नमः ॥ २० ॥
- ॐ पद्मकैरव मंदार सुमालिन्यै नमः
- ॐ सुवर्ण कुंभयुग्माभ सुकुचायै नमः
- ॐ रमणीयचतुर्भाहु संयुक्तायै नमः
- ॐ कनकांगद केयूर भूषितायै नमः
- ॐ बृहत्सौवर्ण सौंदर्य वसनायै नमः
- ॐ बृहन्नितंब विलसज्जघनायै नमः
- ॐ सौभाग्यजात शृंगार मध्यमायै नमः
- ॐ दिव्यभूषणसंदोह रंजितायै नमः
- ॐ पारिजातगुणाधिक्य पदाब्जायै नमः
- ॐ सुपद्मरागसंकाश चरणायै नमः ॥ ३० ॥
- ॐ कामकोटि महापद्म पीठस्थायै नमः
- ॐ श्रीकंठनेत्र कुमुद चंद्रिकायै नमः
- ॐ सचामर रमावाणी विराजितायै नमः
- ॐ भक्त रक्षण दाक्षिण्य कटाक्षायै नमः
- ॐ भूतेशालिंगनोध्बूत पुलकांग्यै नमः
- ॐ अनंगभंगजन कापांग वीक्षणायै नमः
- ॐ ब्रह्मोपेंद्र शिरोरत्न रंजितायै नमः
- ॐ शचीमुख्यामरवधू सेवितायै नमः
- ॐ लीलाकल्पित ब्रह्मांडमंडलायै नमः
- ॐ अमृतादि महाशक्ति संवृतायै नमः ॥ ४० ॥
- ॐ एकापत्र साम्राज्यदायिकायै नमः
- ॐ सनकादि समाराध्य पादुकायै नमः
- ॐ देवर्षभिस्तूयमान वैभवायै नमः
- ॐ कलशोद्भव दुर्वास पूजितायै नमः
- ॐ मत्तेभवक्त्र षड्वक्त्र वत्सलायै नमः
- ॐ चक्रराज महायंत्र मध्यवर्यै नमः
- ॐ चिदग्निकुंडसंभूत सुदेहायै नमः
- ॐ शशांकखंडसंयुक्त मकुटायै नमः
- ॐ मत्तहंसवधू मंदगमनायै नमः
- ॐ वंदारुजनसंदोह वंदितायै नमः ॥ ५० ॥
- ॐ अंतर्मुख जनानंद फलदायै नमः
- ॐ पतिव्रतांगनाभीष्ट फलदायै नमः
- ॐ अव्याजकरुणापूरपूरितायै नमः
- ॐ नितांत सच्चिदानंद संयुक्तायै नमः
- ॐ सहस्रसूर्य संयुक्त प्रकाशायै नमः
- ॐ रत्नचिंतामणि गृहमध्यस्थायै नमः
- ॐ हानिवृद्धि गुणाधिक्य रहितायै नमः
- ॐ महापद्माटवीमध्य निवासायै नमः
- ॐ जाग्रत् स्वप्न सुषुप्तीनां साक्षिभूत्यै नमः
- ॐ महापापौघपापानां विनाशिन्यै नमः ॥ ६० ॥
- ॐ दुष्टभीति महाभीति भंजनायै नमः
- ॐ समस्त देवदनुज प्रेरकायै नमः
- ॐ समस्त हृदयांभोज निलयायै नमः
- ॐ अनाहत महापद्म मंदिरायै नमः
- ॐ सहस्रार सरोजात वासितायै नमः
- ॐ पुनरावृत्तिरहित पुरस्थायै नमः
- ॐ वाणी गायत्री सावित्री सन्नुतायै नमः
- ॐ रमाभूमिसुताराध्य पदाब्जायै नमः
- ॐ लोपामुद्रार्चित श्रीमच्चरणायै नमः
- ॐ सहस्ररति सौंदर्य शरीरायै नमः ॥ ७० ॥
- ॐ भावनामात्र संतुष्ट हृदयायै नमः
- ॐ सत्यसंपूर्ण विज्ञान सिद्धिदायै नमः
- ॐ त्रिलोचन कृतोल्लास फलदायै नमः
- ॐ सुधाब्धि मणिद्वीप मध्यगायै नमः
- ॐ दक्षाध्वर विनिर्भेद साधनायै नमः
- ॐ श्रीनाथ सोदरीभूत शोभितायै नमः
- ॐ चंद्रशेखर भक्तार्ति भंजनायै नमः
- ॐ सर्वोपाधि विनिर्मुक्त चैतन्यायै नमः
- ॐ नामपारायणाभीष्ट फलदायै नमः
- ॐ सृष्टि स्थिति तिरोधान संकल्पायै नमः ॥ ८० ॥
- ॐ श्रीषोडशाक्षरि मंत्र मध्यगायै नमः
- ॐ अनाद्यंत स्वयंभूत दिव्यमूर्त्यै नमः
- ॐ भक्तहंस परीमुख्य वियोगायै नमः
- ॐ मातृ मंडल संयुक्त ललितायै नमः
- ॐ भंडदैत्य महसत्त्व नाशनायै नमः
- ॐ क्रूरभंड शिरछ्चेद निपुणायै नमः
- ॐ धात्र्यच्युत सुराधीश सुखदायै नमः
- ॐ चंडमुंडनिशुंभादि खंडनायै नमः
- ॐ रक्ताक्ष रक्तजिह्वादि शिक्षणायै नमः
- ॐ महिषासुरदोर्वीर्य निग्रहयै नमः ॥ ९० ॥
- ॐ अभ्रकेश महोत्साह कारणायै नमः
- ॐ महेशयुक्त नटन तत्परायै नमः
- ॐ निजभर्तृ मुखांभोज चिंतनायै नमः
- ॐ वृषभध्वज विज्ञान भावनायै नमः
- ॐ जन्ममृत्युजरारोग भंजनायै नमः
- ॐ विदेहमुक्ति विज्ञान सिद्धिदायै नमः
- ॐ कामक्रोधादि षड्वर्ग नाशनायै नमः
- ॐ राजराजार्चित पदसरोजायै नमः
- ॐ सर्ववेदांत संसिद्द सुतत्त्वायै नमः
- ॐ श्री वीरभक्त विज्ञान निधानायै नमः ॥ १०० ॥
- ॐ आशेष दुष्टदनुज सूदनायै नमः
- ॐ साक्षाच्च्रीदक्षिणामूर्ति मनोज्ञायै नमः
- ॐ हयमेथाग्र संपूज्य महिमायै नमः
- ॐ दक्षप्रजापतिसुत वेषाढ्यायै नमः
- ॐ सुमबाणेक्षु कोदंड मंडितायै नमः
- ॐ नित्ययौवन मांगल्य मंगलायै नमः
- ॐ महादेव समायुक्त शरीरायै नमः
- ॐ महादेव रत्यौत्सुक्य महदेव्यै नमः
- ॐ चतुर्विंशतंत्र्यैक रूपायै ॥१०८ ॥
- श्री ललिताष्टोत्तर शतनामावलि संपूर्णम्
Sri lalitha ashtotram
श्री ललिता त्रिपुरा सुंदरी की दिव्य महिमा अनंत और अकथनीय है, जो सृष्टि के कण-कण में समाई हुई है। वे हिमालय के शिखर पर विराजमान, शिव की अर्धांगिनी के रूप में शोभायमान हैं, जिनका सौंदर्य और तेजस्विता त्रिलोकी को मोहित करता है। उनकी आभा पंचदशी मंत्र में प्रकट होती है, जो समस्त सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार की शक्ति का प्रतीक है। उनके आभूषण, मुकुट, तिलक, नेत्र, नासिका, कपोल, वदन, कंठ, और चरणों की शोभा अनुपम है, जो भक्तों के हृदय में श्रद्धा और प्रेम का संचार करती है। वे चिदग्निकुंड से प्रकट, अमृत स्वरूपा, और अनंत शक्तियों की स्वामिनी हैं, जो ज्ञान, विज्ञान, आरोग्य, और ऐश्वर्य प्रदान करती हैं। भक्तों की रक्षा और दुष्टों का संहार करते हुए, वे समस्त देवगणों द्वारा पूजित हैं, और उनके चरणों में सृष्टि का समस्त वैभव समर्पित है। उनकी कृपा से भक्तों के पाप, भय, रोग, और दुख नष्ट हो जाते हैं, और जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का उदय होता है।
इस दिव्य शक्ति की साधना से साधक का जीवन सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हो जाता है। उनके नामों का उच्चारण हृदय में आध्यात्मिक जागृति लाता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है। यह साधना न केवल सांसारिक कष्टों, बाधाओं, और नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है, बल्कि साधक को आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करती है। श्री ललिता की कृपा से जीवन में संतुलन, आनंद, और शांति का वास होता है, और साधक को समस्त सिद्धियों और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। उनकी उपासना से हृदय में प्रेम, भक्ति, और समर्पण का भाव जागृत होता है, जो साधक को परम सत्य की ओर ले जाता है। यह नामावली का पाठ एक ऐसा पवित्र मार्ग है, जो भक्त को देवी के चरणों में समर्पित कर, उनके अनंत प्रेम और शक्ति का भागी बनाता है।
జై శ్రీ రామ్! శ్రీమాత యొక్క అష్టోత్తర శతనామాలు హృదయాన్ని స్పృశించే శక్తి కలిగినవి, ప్రతి నామం ఆమె అనంత శక్తి మరియు కరుణను ప్రతిబింబిస్తుంది. ఆమె శక్తి సమస్త సృష్టిలో నీడవలె నీడలేకుండా వ్యాపించి ఉంది. పంచభూతములు, పంచ ప్రాణములు, పంచ తన్మాత్రలు—ఇవన్నీ శ్రీమాత శక్తి లేనిదే నిర్జీవమై, ప్రేతములవలె నిశ్చలంగా మిగిలిపోతాయి. ఆమె ఆసీనురాలై ఉండటం వల్లనే ఈ సమస్తం జీవముతో, స్పందనతో, శక్తితో నిండి ఉంటుంది. ఆమె లేనిదే సృష్టిలో కదలిక లేదు, ప్రాణం లేదు, స్పందన లేదు. శ్రీమాత అనుగ్రహం లేనిదే నిద్ర నుండి మేల్కొనుట కూడా అసాధ్యం. ఆమె శక్తి సృష్టి యొక్క ఆధారం, జీవనాడి, ఆమె దివ్య సాన్నిధ్యం వల్లనే సమస్తం చైతన్యమై ప్రకాశిస్తుంది.
త్రిమూర్తులైన బ్రహ్మ, విష్ణు, రుద్రులలో కూడా శ్రీమాత శక్తియే వారి ప్రభావానికి మూలం. ఆమె లేనిదే వారు కేవలం నిర్జీవమైన ప్రేతములవలె ఉంటారు. అగ్ని, పదార్థం, ప్రకృతి—ఇవన్నీ శ్రీమాత యొక్క విద్యుత్ శక్తి వల్లనే సజీవంగా, ప్రభావశీలంగా ఉన్నాయి. ఆమె అనుగ్రహం శాశ్వతంగా త్రిమూర్తులను, సృష్టిని నడిపిస్తుంది, వారిని అవశత్వం నుండి రక్షిస్తుంది. శ్రీమాత లేనిదే సృష్టి నిర్మాణం సాధ్యం కాదు, ఆమె కృప లేనిదే జీవుడు ప్రేతమై, యాతనా శరీరంలో అవశుడై ఉంటాడు. ఆమె కరుణ వల్లనే సమస్త జీవరాశులు, దేవతలు, సృష్టి చైతన్యవంతంగా ఉంటాయి. శ్రీమాత యొక్క నామ స్మరణ, పూజల ద్వారా ఆమె అనుగ్రహం పొందిన భక్తుడు ఆధ్యాత్మిక ఉన్నతిని, జీవన శక్తిని పొందుతాడు.
ॐ राजतचला श्रृंगग्र मध्यशाधै नमः
ॐ हिमाचल महावंश पवनयै नमः
ॐ शंकरार्धंग सौन्दर्य सलायै नमः
ॐ लसंमरकातः स्वच्छविग्रहायै नमः
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