श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली
श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली
भगवान् दत्तात्रेय को त्रिदेव कहा जाता है क्यों की दत्तात्रेय भगवान् ने विष्णु ब्रह्मा और महेश के आध्यात्मिक विचारों का विलय किया था। सर्प्रथम इन्होने ही व्यायाम उड़न शक्ति का पता लगाया था। इन्हे चिकित्सा और वैज्ञानिक क्षेत्र में क्रांतिकारी जानकारियों और आविष्कारों के लिए जाना जाता है। पुराणों अनुसार इनके तीन मुख, छह हाथ वाला त्रिदेवमयस्वरूप है। चित्र में इनके पीछे एक गाय तथा इनके आगे चार कुत्ते दिखाई देते हैं। औदुंबर वृक्ष के समीप इनका निवास बताया गया है। विभिन्न मठ, आश्रम और मंदिरों में इनके इसी प्रकार के चित्र का दर्शन होता है। श्री दत्तात्रेय एक हिंदू देवता हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अवतार हैं। उन्हें ज्ञान, ध्यान और मोक्ष के देवता के रूप में पूजा जाता है। दत्तात्रेय को तीन मुख, छह भुजाएँ और एक त्रिशूल के साथ चित्रित किया गया है। उनके तीन मुख ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतिनिधित्व करते हैं, और उनकी छह भुजाएँ ज्ञान, ध्यान, कर्म, भक्ति, ध्यान और मोक्ष का प्रतिनिधित्व करती हैं।
दत्तात्रेय को अक्सर एक बालक के रूप में चित्रित किया जाता है, जो उनके बाल रूप का प्रतीक है। उन्हें अक्सर एक गरुड़ पर सवार भी दिखाया जाता है, जो उनके ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है। दत्तात्रेय को विभिन्न हिंदू ग्रंथों में वर्णित किया गया है, जिसमें ब्रह्म पुराण, विष्णु पुराण और शिव पुराण शामिल हैं। इन ग्रंथों में उन्हें एक महान ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है, जिन्होंने सभी तीनों देवताओं से ज्ञान प्राप्त किया था।
दत्तात्रेय को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है। उन्हें अक्सर ज्ञान और मोक्ष के मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की जाती है। दत्तात्रेय के भक्तों में कई हिंदू संत और योगियों शामिल हैं। दत्तात्रेय जयंती हर साल भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। भक्त भी इस दिन व्रत रखते हैं और दत्तात्रेय की पूजा करते हैं। दत्तात्रेय एक लोकप्रिय हिंदू देवता हैं, और उनकी पूजा भारत के कई हिस्सों में की जाती है। उन्हें ज्ञान, ध्यान और मोक्ष के देवता के रूप में माना जाता है, और उनके भक्तों में कई हिंदू संत और योगियों शामिल हैं।
दत्तात्रेय को अक्सर एक बालक के रूप में चित्रित किया जाता है, जो उनके बाल रूप का प्रतीक है। उन्हें अक्सर एक गरुड़ पर सवार भी दिखाया जाता है, जो उनके ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है। दत्तात्रेय को विभिन्न हिंदू ग्रंथों में वर्णित किया गया है, जिसमें ब्रह्म पुराण, विष्णु पुराण और शिव पुराण शामिल हैं। इन ग्रंथों में उन्हें एक महान ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है, जिन्होंने सभी तीनों देवताओं से ज्ञान प्राप्त किया था।
दत्तात्रेय को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है। उन्हें अक्सर ज्ञान और मोक्ष के मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की जाती है। दत्तात्रेय के भक्तों में कई हिंदू संत और योगियों शामिल हैं। दत्तात्रेय जयंती हर साल भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। भक्त भी इस दिन व्रत रखते हैं और दत्तात्रेय की पूजा करते हैं। दत्तात्रेय एक लोकप्रिय हिंदू देवता हैं, और उनकी पूजा भारत के कई हिस्सों में की जाती है। उन्हें ज्ञान, ध्यान और मोक्ष के देवता के रूप में माना जाता है, और उनके भक्तों में कई हिंदू संत और योगियों शामिल हैं।
- ॐ श्रीदत्ताय नमः ।
- ॐ देवदत्ताय नमः ।
- ॐ ब्रह्मदत्ताय नमः ।
- ॐ विष्णुदत्ताय नमः ।
- ॐ शिवदत्ताय नमः ।
- ॐ अत्रिदत्ताय नमः ।
- ॐ आत्रेयाय नमः ।
- ॐ अत्रिवरदाय नमः ।
- ॐ अनुसूयायै नमः ।
- ॐ अनसूयासूनवे नमः ।
- ॐ अवधूताय नमः ।
- ॐ धर्माय नमः ।
- ॐ धर्मपरायणाय नमः ।
- ॐ धर्मपतये नमः ।
- ॐ सिद्धाय नमः ।
- ॐ सिद्धिदाय नमः ।
- ॐ सिद्धिपतये नमः ।
- ॐ सिद्धसेविताय नमः ।
- ॐ गुरवे नमः ।
- ॐ गुरुगम्याय नमः ।
- ॐ गुरोर्गुरुतराय नमः ।
- ॐ गरिष्ठाय नमः ।
- ॐ वरिष्ठाय नमः ।
- ॐ महिष्ठाय नमः ।
- ॐ महात्मने नमः ।
- ॐ योगाय नमः ।
- ॐ योगगम्याय नमः ।
- ॐ योगीदेशकराय नमः ।
- ॐ योगरतये नमः ।
- ॐ योगीशाय नमः ।
- ॐ योगाधीशाय नमः ।
- ॐ योगपरायणाय नमः ।
- ॐ योगिध्येयाङ्घ्रिपङ्कजाय नमः ।
- ॐ दिगम्बराय नमः ।
- ॐ दिव्याम्बराय नमः ।
- ॐ पीताम्बराय नमः ।
- ॐ श्वेताम्बराय नमः ।
- ॐ चित्राम्बराय नमः ।
- ॐ बालाय नमः ।
- ॐ बालवीर्याय नमः ।
- ॐ कुमाराय नमः ।
- ॐ किशोराय नमः ।
- ॐ कन्दर्पमोहनाय नमः ।
- ॐ अर्धाङ्गालिङ्गिताङ्गनाय नमः ।
- ॐ सुरागाय नमः ।
- ॐ विरागाय नमः ।
- ॐ वीतरागाय नमः ।
- ॐ अमृतवर्षिणे नमः ।
- ॐ उग्राय नमः ।
- ॐ अनुग्ररूपाय नमः ।
- ॐ स्थविराय नमः ।
- ॐ स्थवीयसे नमः ।
- ॐ शान्ताय नमः ।
- ॐ अघोराय नमः ।
- ॐ गूढाय नमः ।
- ॐ ऊर्ध्वरेतसे नमः ।
- ॐ एकवक्त्राय नमः ।
- ॐ अनेकवक्त्राय नमः ।
- ॐ द्विनेत्राय नमः ।
- ॐ त्रिनेत्राय नमः ।
- ॐ द्विभुजाय नमः ।
- ॐ षड्भुजाय नमः ।
- ॐ अक्षमालिने नमः ।
- ॐ कमण्डलुधारिणे नमः ।
- ॐ शूलिने नमः ।
- ॐ डमरुधारिणे नमः ।
- ॐ शङ्खिने नमः ।
- ॐ गदिने नमः ।
- ॐ मुनये नमः ।
- ॐ मौलिने नमः ।
- ॐ विरूपाय नमः ।
- ॐ स्वरूपाय नमः ।
- ॐ सहस्रशिरसे नमः ।
- ॐ सहस्राक्षाय नमः ।
- ॐ सहस्रबाहवे नमः ।
- ॐ सहस्रायुधाय नमः ।
- ॐ सहस्रपादाय नमः ।
- ॐ सहस्रपद्मार्चिताय नमः ।
- ॐ पद्महस्ताय नमः ।
- ॐ पद्मपादाय नमः ।
- ॐ पद्मनाभाय नमः ।
- ॐ पद्ममालिने नमः ।
- ॐ पद्मगर्भारुणाक्षाय नमः ।
- ॐ पद्मकिञ्जल्कवर्चसे नमः ।
- ॐ ज्ञानिने नमः ।
- ॐ ज्ञानगम्याय नमः ।
- ॐ ज्ञानविज्ञानमूर्तये नमः ।
- ॐ ध्यानिने नमः ।
- ॐ ध्याननिष्ठाय नमः ।
- ॐ ध्यानसिमितमूर्तये नमः ।
- ॐ धूलिधूसरिताङ्गाय नमः ।
- ॐ चन्दनलिप्तमूर्तये नमः ।
- ॐ भस्मोद्धूलितदेहाय नमः ।
- ॐ दिव्यगन्धानुलेपिने नमः ।
- ॐ प्रसन्नाय नमः ।
- ॐ प्रमत्ताय नमः ।
- ॐ प्रकृष्टार्थप्रदाय नमः ।
- ॐ अष्टैश्वर्यप्रदाय नमः ।
- ॐ वरदाय नमः ।
- ॐ वरीयसे नमः ।
- ॐ ब्रह्मणे नमः ।
- ॐ ब्रह्मरूपाय नमः ।
- ॐ विष्णवे नमः ।
- ॐ विश्वरूपिणे नमः ।
- ॐ शङ्कराय नमः ।
- ॐ आत्मने नमः ।
- ॐ अन्तरात्मने नमः ।
- ॐ परमात्मने नमः ।
Dattatreya Ashtottra Shatanamavali | 108 Names of Lord Dattatreya
भगवान दत्तात्रेय को हिंदू धर्म में त्रिदेव का अवतार माना जाता है, क्योंकि उनके स्वरूप में ब्रह्मा, विष्णु और शिव—तीनों देवताओं का समावेश है। उनके तीन मुख ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतिनिधित्व करते हैं और छह भुजाएँ उनके विविध शक्तियों और गुणों का प्रतीक हैं। दत्तात्रेय के स्वरूप में ज्ञान, ध्यान, योग, भक्ति, मोक्ष और कर्म का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। पुराणों के अनुसार, भगवान दत्तात्रेय ने आध्यात्मिक दृष्टि से तीनों देवताओं के विचारों का विलय किया और व्यायाम, विज्ञान, चिकित्सा, और योग के क्षेत्र में क्रांतिकारी ज्ञान दिया। उनके चित्रण में उनके पीछे एक गाय और चार कुत्ते दिखाए जाते हैं, जो पृथ्वी और चार वेदों का प्रतीक माने जाते हैं। औदुंबर वृक्ष के समीप उनका निवास बताया गया है, और वे अक्सर बालक रूप में भी पूजे जाते हैं, जिससे उनकी सदा नवीन, निर्मल और सरल प्रकृति झलकती है।
श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली, अर्थात् दत्तात्रेय जी के 108 नाम, उनके विविध दिव्य स्वरूप, गुण, शक्तियों और लीलाओं का विस्तार से वर्णन करती है। इन नामों में उन्हें श्रीदत्त, देवदत्त, ब्रह्मदत्त, विष्णुदत्त, शिवदत्त, अत्रिदत्त, योगीश, सिद्धिदाता, गुरुओं के गुरु, दिगंबर, बाल, कुमार, योगी, ध्यानमग्न, अमृतवर्षी, शान्त, अघोर, त्रिनेत्र, षड्भुज, ज्ञानमूर्ति, ध्याननिष्ठ, ब्रह्मरूप, विश्वरूप, परमात्मा आदि विविध रूपों में स्मरण किया गया है। हर नाम उनके किसी विशिष्ट गुण, शक्ति या लीला को दर्शाता है, जैसे कि वे योग के अधिपति हैं, सिद्धियों के दाता हैं, ध्यान और ज्ञान के प्रतीक हैं, वरदायक हैं, भस्मधारी हैं, चंदन से सुशोभित हैं, सहस्र नेत्र, सहस्र बाहु, सहस्र शिर, पद्महस्त, पद्मनाभ, और ब्रह्म, विष्णु, शंकर के रूप में पूजे जाते हैं।
इन नामों का पाठ करने से साधक को भगवान दत्तात्रेय की कृपा प्राप्त होती है। यह नामावली साधक के जीवन में ज्ञान, ध्यान, योग, भक्ति, मोक्ष, आरोग्य, शांति, सिद्धि और आत्मबल का संचार करती है। दत्तात्रेय की उपासना से साधक के सभी पाप, भय, रोग, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं। दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ विशेष रूप से दत्तात्रेय जयंती, गुरुवार, पूर्णिमा, और विशेष अनुष्ठानों में किया जाता है। यह नामावली साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति का सशक्त साधन है। भगवान दत्तात्रेय के ये 108 नाम भारतीय संत परंपरा, योग, तंत्र और गुरु-शिष्य परंपरा में अत्यंत पूज्य और प्रभावशाली माने जाते हैं।
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श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली, अर्थात् दत्तात्रेय जी के 108 नाम, उनके विविध दिव्य स्वरूप, गुण, शक्तियों और लीलाओं का विस्तार से वर्णन करती है। इन नामों में उन्हें श्रीदत्त, देवदत्त, ब्रह्मदत्त, विष्णुदत्त, शिवदत्त, अत्रिदत्त, योगीश, सिद्धिदाता, गुरुओं के गुरु, दिगंबर, बाल, कुमार, योगी, ध्यानमग्न, अमृतवर्षी, शान्त, अघोर, त्रिनेत्र, षड्भुज, ज्ञानमूर्ति, ध्याननिष्ठ, ब्रह्मरूप, विश्वरूप, परमात्मा आदि विविध रूपों में स्मरण किया गया है। हर नाम उनके किसी विशिष्ट गुण, शक्ति या लीला को दर्शाता है, जैसे कि वे योग के अधिपति हैं, सिद्धियों के दाता हैं, ध्यान और ज्ञान के प्रतीक हैं, वरदायक हैं, भस्मधारी हैं, चंदन से सुशोभित हैं, सहस्र नेत्र, सहस्र बाहु, सहस्र शिर, पद्महस्त, पद्मनाभ, और ब्रह्म, विष्णु, शंकर के रूप में पूजे जाते हैं।
इन नामों का पाठ करने से साधक को भगवान दत्तात्रेय की कृपा प्राप्त होती है। यह नामावली साधक के जीवन में ज्ञान, ध्यान, योग, भक्ति, मोक्ष, आरोग्य, शांति, सिद्धि और आत्मबल का संचार करती है। दत्तात्रेय की उपासना से साधक के सभी पाप, भय, रोग, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं। दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ विशेष रूप से दत्तात्रेय जयंती, गुरुवार, पूर्णिमा, और विशेष अनुष्ठानों में किया जाता है। यह नामावली साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति का सशक्त साधन है। भगवान दत्तात्रेय के ये 108 नाम भारतीय संत परंपरा, योग, तंत्र और गुरु-शिष्य परंपरा में अत्यंत पूज्य और प्रभावशाली माने जाते हैं।
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