मेरे पौणाहारी जिनके करीब होते है भजन

मेरे पौणाहारी जिनके करीब होते है

मेरे पौणाहारी जिनके करीब होते है,
कौन कहता वो जग में गरीब होते है,
मेरे पौणाहारी जिनके करीब होते है,

पुरे सपने सभी के वो कर देते है,
झोली भगतो की रेहमत से भर देते है,
दास जो भी इनके सब अजीज होते है,
मेरे दुधाधारी जिनके करीब होते है,

मेरे बाबा की ज्योति जगा तो सही,
इक बार उसको दिल से भुला तो सही,
उसके भगतो के अच्छे नसीब होते है,
मेरे चिमटेवाले  जिनके करीब होते है,

सारी टेंशन तो बाबा मिटा देते है,
सारे गम मेरे जोगी भुला देते है,
मेरे बाबा जी के जो भी करीब होते है,
मेरे जोगी जी के जो भी अज़ीज होते है,
मेरे दूधाधारी जिनके करीब होते है,

कमल कवी क्या सोचे तू तर जाएगा,
श्रद्धा लेके जो बाबा के दर जायेगे,
मेरे जोगी को जो भी हबीब होते है,
मेरे धुनि वाले  जिनके करीब होते है,



POUNAHARI JINKE KAREEB HOTEY HAY || KAMAL KISHORE || FULL MP3 || BABA BALAKNATH BHAJAN

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Bhajan - Pounahari Jinke Karreb Hote hay
Singer - Kamal Kishore
Music - Zakir Hussain
Producer - Sanjeev Kumar
Company Contact - +91 92893-71063
Label - Aashirwad Music 
Digital - Bhaktirasa
 
बाबा बालकनाथ जी (जिन्हें सिद्ध बाबा बालक नाथ, दयोटसिद्ध वाले बाबा या पौणाहारी भी कहा जाता है) हिमाचल प्रदेश और पंजाब में बहुत प्रसिद्ध सिद्ध योगी और देवता हैं। वे भगवान कार्तिकेय (शिव-पार्वती के पुत्र) के अवतार माने जाते हैं और कलयुग में सिद्ध पुरुष के रूप में प्रकट हुए। "पौनाहारी" (या पौणाहारी/पोनाहारी) नाम का मतलब है "दूध देने वाला" या "दूध से पोषण करने वाला"। यह नाम पंजाबी/हिमाचली लोक भाषा में "पौना" (दूध) + "हारी" (लेने वाला/देने वाला) से मिलकर बना है।

बाबा बालकनाथ जी की कथा के अनुसार, कलयुग में वे गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में जन्मे थे। बचपन से ही वे आध्यात्मिक थे और घर-परिवार छोड़कर सिद्धि की राह पर निकल गए। एक समय वे एक गरीब महिला रत्नो (या रत्ना देवी) के पास गायों की रखवाली करते थे। बदले में रत्नो उन्हें रोटी और दूध/लस्सी (दूध से बनी चीजें) खिलाती थीं। बाबा जी ने बहुत कम उम्र में ही सिद्धि प्राप्त कर ली और हमेशा बालक रूप (युवा/बाल रूप) में रहने का वरदान पाया। उनकी इस लीला और दूध-रोटी से जुड़े प्रसाद के कारण भक्त उन्हें "पौनाहारी" कहने लगे, यानी दूध देने वाला या दूध से पालने वाला बाबा। आज भी उनके मंदिरों (जैसे दयोटसिद्ध, शाहतलाई आदि) में भक्त रोटी, दूध, लस्सी और घी का प्रसाद चढ़ाते हैं, और बाबा को दूधधारी या पौनाहारी के नाम से पुकारते हैं।
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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