बरसे बुंदियाँ सावन की मनभावन भजन
बरसे बुंदियाँ सावन की मनभावन की भजन
बरसै बुंदियाँ सावन की,सावन की मनभावन की।
सावन में उमग्यो मेरो मन,
भनक सुनी हरि आवन की।
उमड़ घुमड़ चहुं दिसि से आयो,
दामनि दमके झर लावन की।
बरसै बुंदियाँ सावन की,
सावन की मनभावन की।
नन्हीं नन्हीं बूंदन मेहा बरसै,
सीतल उपवन सोहावन की।
मीराके प्रभु गिरधर नागर,
आनंद मंगल गावन की।
बरसै बुंदियाँ सावन की
सावन की मनभावन की।।
Lata Mangshkar--Barase Bundiya Sawan Ki (SEDE 3311)
Singer: Lata Mangeshkar
Song: Barase Bundiya Sawan Ki (Meera Bhajan)
Music Direction: Hridaynath Mangeshkar
7" 45-rpm Extended Play vinyl published by Columbia in 1965. Record No. SEDE 3311, Matrix No. 7TCEI. 2017.
Record collected, digitised & uploaded by Rajib Chakraborty
सावन की बरसती बूँदों में जब हरि के आने की भनक सुनाई पड़ती है, तो मन खुद‑ब‑खुद हरे‑भरे उपवन की तरह फूल उठता है। बिजली चमकती है, दामिन बारिश की धारा बनकर झरने की तरह बह जाती है, और लगता है जैसे चारों दिशाओं से ही एक मधुर आहट आ रही हो। यह वही समय लगता है जब प्रकृति सोई हुई कहानियाँ फिर से जग जाती है, मानो पहले से ही लिखी रास्ता आने वाले आशीर्वाद को दिखाने के लिए तैयार था। जब ऐसा लगता है कि बारिश बस पानी ही नहीं बरस रही, बल्कि दिल में छिपा एक पुराना इंतज़ार भी धीरे‑धीरे टप टप बरस रहा हो।
छोटी‑छोटी बूँदों से नीचे के उपवन और ऊपर के आकाश दोनों एक हो जाते हैं – ठंडा‑सा आराम देती छाँव, हरियाली की मीठी खुशबू और दूर से बजते घंटों की तरह आवाज़ें। उस वक्त मीरा के प्रभु गिरधर नागर की याद और भी निकट आ जाती है, जैसे सावन की बारिश सिर्फ पेड़‑पौधों को नहीं, बल्कि भक्ति की लतों को भी सींच रही हो। जब मन इतने निकट आता है कि हर बूँद में हरि की गुज़रगाह दिख जाती है, तो जीवन की हर सूखी नदी भी अपने आप भर जाती लगती है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री गिरधर नागर जी की।
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