कभी धूप कभी छाँव कभी धूप कभी छाँव भजन

कभी धूप कभी छाँव कभी धूप कभी छाँव भजन

कभी धूप कभी छाँव लिरिक्स Kabhi Dhoop Kabhi Chhanv Lyrics
 
सुख दुःख दोनों रहते जिसमें, जीवन है वो गाँव,
कभी धूप कभी छाँव, कभी धूप तो कभी छाँव,
भले भी दिन आते जगत में, बुरे भी दिन आते,
कड़वे मीठे फल करम के यहाँ सभी पाते,
कभी सीधे कभी उल्टे पड़ते अजब समय के पाँव,
कभी धूप कभी छाँव, कभी धूप तो कभी छाँव,
सुख दुःख दोनों रहते जिसमें, जीवन है वो गाँव,

क्या खुशियाँ क्या गम, यह सब मिलते बारी बारी
मालिक की मर्ज़ी पे चलती यह दुनिया सारी
ध्यान से खेना जग नदिया में बन्दे अपनी नाव
कभी धूप कभी छाँव, कभी धूप तो कभी छाँव
सुख दुःख दोनों रहते जिसमें, जीवन है वो गाँव


सुख दुःख दोनों रहते जिसमें, जीवन है वो गाँव,
कभी धूप कभी छाँव, कभी धूप तो कभी छाँव,

Kabhi Dhoop Kabhi Chhaon

गीत: Kabhi Dhoop Kabhi Chhaon
गायक: प्रदीप (Kavi Pradeep)
फिल्म: यह गाना “Kabhi Dhoop Kabhi Chhaon” नामक 1971 की हिंदी फिल्म का शीर्षक गीत है।
निर्देशक (फिल्म): चंद्रकांत गौड़ (Chandrakant)
मुख्य कलाकार: दारा सिंह, अमीटा, गीतांजलि, जगदीप आदि।
म्यूजिक (संगीत): संगीतकार चित्रगुप्त (Chitragupt Shrivastava) हैं।
गीतकार / गीत के बोल (लिरिस्‍ट): कवि प्रदीप (Kavi Pradeep)

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"सुख दुःख दोनों रहते जिसमें, जीवन है वो गाँव" गीत एक जीवनदर्शी गीत है जो जीवन के सुख-दुःख को स्वीकार करने की बात करता है।  गीत की शुरुआत में, गायक जीवन को एक गांव के रूप में चित्रित करता है जिसमें सुख और दुःख दोनों रहते हैं। वह कहता है कि जीवन में कभी धूप होती है तो कभी छाँव। गीत के दूसरे भाग में, गायक जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने की बात करता है। वह कहता है कि जीवन में अच्छे और बुरे दिन आते हैं। हमें इन दोनों का स्वीकार करना चाहिए।
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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