हरि तुम हरो जन की पीर कृष्णा भजन

हरि तुम हरो जन की पीर कृष्णा जगजीत सिंह भजन

 
हरि तुम हरो जन की पीर Hari Tum Haro Jan Ki Peer Lyrics Meera Bhajan Lyrics

हरि तुम हरो जन की भीर।
द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर॥
भक्त कारण रूप नरहरि, धरयो आप शरीर।
हिरणकश्यपु मार दीन्हों, धरयो नाहिंन धीर॥
बूडते गजराज राखे, कियो बाहर नीर।
दासि 'मीरा लाल गिरिधर, दु:ख जहाँ तहँ पीर॥
 
Hari Tum Haro Jan Kee Bheer.
Dropadee Kee Laaj Raakhee, Tum Badhaayo Cheer.
Bhakt Kaaran Roop Narahari, Dharayo Aap Shareer.
Hiranakashyapu Maar Deenhon, Dharayo Naahinn Dheer.
Boodate Gajaraaj Raakhe, Kiyo Baahar Neer.
Daasi Meera Laal Giridhar, Du:kh Jahaan Tahan Peer. 


 
Hari Tum Haro Jan Ki Peer - Live Concert | Jagjit Singh Bhajans
 
Song Name - Hari Tum Haro Jan Ki Peer (Mahamantra - Hare Krishna...Raag Puriya Dhanashree)
Singer - Jagjit Singh
Lyrics - Meera Bai
Music Composer - Jagjit Singh
Music Label - Sony Music Entertainment India Pvt. Ltd.
© 1998 Sony Music Entertainment India Pvt. Ltd.
 
हरि की लीला देखो, द्रोपदी की लाज बचाई चीर बढ़ाकर, भक्तों के लिए नरहरि रूप धारण किया हिरण्यकशिपु का संहार कर दिया। गजराज को डूबते देखा तो नीर से बाहर खींच लाए, मीरा जैसी दासी को हर दुख हर लिया। भीर हरने वाले हर जगह पहुँच जाते हैं, चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो। जीवन में जब डर लगे तो बस नाम ले लो, वो सिर पर हाथ रख देते हैं।

कितनी बार सोचा है ना, मुश्किल घड़ी में कोई साथ दे तो कितना सुकून मिले। हरि तो वैसे ही आ जाते हैं, रूप बदलकर रक्षा करते जाते हैं। मीरा की तरह समर्पण कर दो तो दुख पीर कहाँ ठहर पाते। ये प्रेम का बंधन इतना गहरा है कि दिल कहता है बस यहीं रह लूँ, हर सांस में उनकी कृपा घुली रहे, जीवन भर की थकान मिट जाए। 

यह भजन भी देखिये
Next Post Previous Post