सांवरियो म्हारो भाव बिना नहीं रीझे
सांवरियो म्हारो भाव बिना नहीं रीझे
सांवरियो म्हारो,
भाव बिना नहीं रीझे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
ना कोई माने बात भजन की,
वेद पुराण पढ़ीजे,
गुरु बिन ज्ञान ध्यान ना उपजे,
लाख जतन कर लीजे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
दुर्योधन रा मेवा त्यागिया,
कंचन थाल परोसे,
जाय विदुर घर छिलका खाया,
रुचि रुचि भोग लगीजे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
भीलणी रा बोर सुदामे रे चावल,
करमां री सुण लीजे,
खाटी छाछ खीचड़ो खायो,
किण ने ओलमा दीजे रे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
प्रेम भाव रो भूखो बालो,
ऊंच नीच ना देखे रे,
दास भगत सतगुरु जी रे शरणे,
कान खोल सुण लीजे रे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
सांवरियो म्हारो,
भाव बिना नहीं रीझे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
भाव बिना नहीं रीझे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
ना कोई माने बात भजन की,
वेद पुराण पढ़ीजे,
गुरु बिन ज्ञान ध्यान ना उपजे,
लाख जतन कर लीजे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
दुर्योधन रा मेवा त्यागिया,
कंचन थाल परोसे,
जाय विदुर घर छिलका खाया,
रुचि रुचि भोग लगीजे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
भीलणी रा बोर सुदामे रे चावल,
करमां री सुण लीजे,
खाटी छाछ खीचड़ो खायो,
किण ने ओलमा दीजे रे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
प्रेम भाव रो भूखो बालो,
ऊंच नीच ना देखे रे,
दास भगत सतगुरु जी रे शरणे,
कान खोल सुण लीजे रे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
सांवरियो म्हारो,
भाव बिना नहीं रीझे,
सांवरियो म्हारो,
प्रेम बिना ना रीझे।।
साँवरियों म्हारो भाव बिना नही रीझे॥ Sanwariyo Mharo Bhaw Bina Nahi Rijhe ॥ 2024 Bhajan ॥
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Admin - Saroj Jangir
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