साधो भाई जीवत ही करो आसा भजन

साधो भाई जीवत ही करो आसा भजन

 
साधो भाई जीवत ही करो आसा Sadho Bhayi Jivat Hi Karo Aasa Lyrics

साधो भाई ,जीवत ही करो आसा |
जीवत समझे जीवत बुझे, जीवत मुक्तिनिवासा |
जीवत करम की फाँस न काटी ,मुये मुक्ति की आसा |
तन छूटे जिव मिलन कहत है, सो सब झूठी आसा |
अबहूँ मिला तो तबहूँ मिलेगा, नहिं तो जमपुर बासा,
सत्त गाहे सतगुरु को चिन्हे , सत्त -नाम बिस्वासा |
कहैं कबीर साधन हितकारी, हम साधन के दासा ||
 
Santan Jaat Na Poochho Niraguniyaan |
Saadh Braahaman Saadh Chhattaree, Saadhai Jaatee Baniyaan |
Saadhanamaan Chhattees Kaum Hai, Tedhee Tor Puchhaniyaan |
Saadhai Naoo Saadhai Dhobee, Saadhai Jaati Hai Bariyaan |
Saadhanamaan Raidaas Sant Hai, Supach Rshi Son Bhangiya |
Hindoo-turk Duee Deen Bane Hain, Kachhoo Na Pahachaaniyaan ||



साधो भाई जीवत ही करो आसा ( Sadho Bhai Jeevat Hi Karo Asha ) - कबीर साहब

कबीरदास जी के इस पद का मूल भाव यह है कि परमात्मा की प्राप्ति और मुक्ति का मार्ग केवल जीवित रहते हुए ही संभव है। प्रथम अंश में वे समझाते हैं कि मनुष्य को जीवित रहते हुए ही सत्य की खोज और मुक्ति की आशा करनी चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति जीते जी ज्ञान प्राप्त कर लेता है और संसार के बंधनों को समझ लेता है, वही वास्तव में मोक्ष का अधिकारी है। यदि कोई व्यक्ति जीवन भर कर्मों के जाल में फंसा रहा और उसने अपने विकारों को नहीं काटा, तो मृत्यु के बाद मुक्ति की इच्छा रखना व्यर्थ है। कबीर इस धारणा का खंडन करते हैं कि शरीर त्यागने के बाद आत्मा का परमात्मा से मिलन होगा; उनके अनुसार यदि मन में जीवित रहते हुए भक्ति और जागरूकता नहीं जागी, तो मृत्यु के पश्चात मोक्ष का दावा एक झूठा आश्वासन मात्र है।

दूसरे अंश में कबीरदास जी वर्तमान क्षण की महत्ता पर बल देते हुए कहते हैं कि यदि ईश्वर से साक्षात्कार इसी जीवन में हो गया, तो परलोक में भी वह साथ रहेगा, अन्यथा आत्मा को मृत्यु के देवता (यमराज) के लोक में ही भटकना पड़ेगा। वे सत्य को पकड़ने, सद्गुरु को पहचानने और सत्य-नाम पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देते हैं। अंत में वे कहते हैं कि जो व्यक्ति सत्य की साधना करते हैं, वे ही वास्तव में हितकारी हैं और कबीर स्वयं को ऐसे सच्चे साधकों का दास स्वीकार करते हैं। इस प्रकार, यह पद कर्मकांडों और मृत्यु के बाद मिलने वाले काल्पनिक स्वर्ग के बजाय वर्तमान में जागृत होकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करने पर जोर देता है।


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