तुम करो दया मेरे साई शबद कीर्तन

तुम करो दया मेरे साई शबद कीर्तन भजन

 
तुम करो दया मेरे साई लिरिक्स Tum Karo Daya Mere Sai Lyrics

तुम करो दया मेरे साई,
ऐसी मत दीजै मेरे ठाकुर,
सदा-सदा तुध धयायी,
तुम करो दया मेरे साई

पानी पखा पी सौ संत आगे,
गुण गोविंद जस गाइ,
सांस सांस में नाम सम्हारे,
एहे विश्राम नित पायी,
तुम करो दया मेरे साई

तुम्हरि कृपा ते मोह मान छूटे,
बिनस जाए भरमाई,
आनंद रूप रवियों सब मधे,
जत कत भेखो जाई,
तुम करो दया मेरे साई

तुम दयाल कृपाल-कृपानिध,
पतित पावन गौसाई,
कोट सुख औ आनंद रज पाए,
मुखत निमख बुलाई,
तुम करो दया मेरे साई

जाप-ताप भगत शापूरी,
जो प्रभ के मन भाई,
नाम जपत,
तृष्णा सब बुझी हैं,
नानक त्रिपत अघाई,
तुम करो दया मेरे साई


Tum Karoh Daya Mere Sai I Bhai Satvinder, Bhai Harvinder Singh

Shabad Gurbani: Tum Karoh Daya Mere Sai
Album: Tum Karoh Daya Mere Sai
Singer: Bhai Satvinder Singh (Delhi Wale), Bhai Harvinder Singh Ji (Delhi Wale)
Music Bhai Satvinder Singh (Delhi Wale), Bhai Harvinder Singh Ji (Delhi Wale)
Lyrics: Traditional
Music on T-Series . .
 
यह भजन "तुम करो दया मेरे साई" एक बहुत ही भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी शबद (गुरबानी भजन) है, जो सिख परंपरा में बहुत लोकप्रिय है। यह मूल रूप से गुरु ग्रंथ साहिब या गुरबानी से प्रेरित है (कुछ स्रोतों में इसे गुरु अंगद देव जी या अन्य गुरुओं से जुड़ा बताया जाता है, लेकिन यह भक्ति गीत के रूप में प्रसिद्ध है)। इसमें भक्त प्रभु (साईं, ठाकुर, गोविंद) से दया, कृपा और निरंतर नाम-स्मरण की प्रार्थना करता है।

तुम करो दया मेरे साई,
ऐसी मत दीजै मेरे ठाकुर,
सदा-सदा तुध धयायी,
तुम करो दया मेरे साई।


अर्थ: हे मेरे साईं (प्रिय प्रभु/मालिक), मुझ पर दया करो। हे मेरे ठाकुर (स्वामी), मुझे ऐसी बुद्धि और मत दो कि मैं सदा-सदा केवल तुम्हारा ही ध्यान और स्मरण करता रहूँ। बार-बार प्रार्थना है कि तुम्हारी कृपा से मेरा मन हमेशा तुममें लगा रहे।

पानी पखा पी सौ संत आगे,
गुण गोविंद जस गाइ,
सांस सांस में नाम सम्हारे,
एहे विश्राम नित पायी,
तुम करो दया मेरे साई।


अर्थ: हे प्रभु, मुझे ऐसी कृपा दो कि मैं पानी और पंखा (सेवा के साधन) लेकर संतों के आगे सेवा करूँ, गोविंद (प्रभु) के गुणों और यश का गान करूँ। हर सांस-सांस में तुम्हारा नाम स्मरण करूँ, और इसी में मुझे हर पल विश्राम (शांति और सुकून) मिलता रहे। दया करो मेरे साईं, कि मेरी जिंदगी नाम-भक्ति में ही बीते।

तुम्हरि कृपा ते मोह मान छूटे,
बिनस जाए भरमाई,
आनंद रूप रवियों सब मधे,
जत कत भेखो जाई,
तुम करो दया मेरे साई।


अर्थ: तुम्हारी कृपा से मेरा मोह (आसक्ति) और अहंकार (मान) छूट जाए, सारे भ्रम और माया नष्ट हो जाएँ। हे प्रभु, तुम आनंद स्वरूप हो और सबमें व्याप्त हो, जहाँ-तहाँ तुम्हें ही देखूँ और तुम्हें ही पाऊँ। तुम्हारी दया से यह अनुभव हो कि सारा जगत तुम्हारा ही रूप है। दया करो मेरे साईं।

तुम दयाल कृपाल-कृपानिध,
पतित पावन गौसाई,
कोट सुख औ आनंद रज पाए,
मुखत निमख बुलाई,
तुम करो दया मेरे साई।


अर्थ: हे दयालु, कृपालु और कृपा के सागर (कृपानिधि), हे पतितों (पापियों) को पवित्र करने वाले गौसाईं (स्वामी)! तुम्हारी कृपा से करोड़ों सुख और आनंद की रज (धूल के समान छोटे सुख) प्राप्त हों, और एक पल में भी मुक्ति (मोक्ष) की प्राप्ति हो जाए। तुम्हारी दया से ही यह संभव है, इसलिए दया करो मेरे साईं।

जाप-ताप भगत शापूरी,
जो प्रभ के मन भाई,
नाम जपत,
तृष्णा सब बुझी हैं,
नानक त्रिपत अघाई,
तुम करो दया मेरे साई।


अर्थ: जो भक्त जप-तप और भक्ति से पूर्ण होते हैं, और जो प्रभु के मन को भाते हैं, वे नाम का जप करते हुए सभी तृष्णाएँ (इच्छाएँ और लालसा) बुझा देते हैं। गुरु नानक देव जी कहते हैं कि ऐसे भक्त तृप्त और संतुष्ट हो जाते हैं, उनकी आत्मा अघाई (पूर्ण संतुष्टि) प्राप्त कर लेती है। हे साईं, ऐसी दया करो कि मैं भी इसी अवस्था को पाऊँ।
 
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