गुरु गम का सागर तमने लाख वंदन भजन
एजी ध्यान मुलम गुरु मूर्ति,
मंत्र मुलम गुरु वाक्यम,
मोक्ष मुलम गुरु कृपा,
गुरु बिन ज्ञान ना उपजे,
गुरु बिना मिले ना मोक्ष,
गुरु बिना लखे कोई सत को,
गुरु बिन मिटे ना दोष।
ए लाख लाख वंदन तमने
कोटि कोटि वंदन
गुरु गम का सागर तमने
लाख लाख वंदन
अज्ञान जिवोडो
गुरु जी शरण में आयो
ए ज्ञान को दीपक गुरु जी
जनाए हो दीजो
गुरु गम का सागर तमने
लाख लाख वंदन
अज्ञानी जीवडो चरणों चरणों में आयो
ज्ञान को दीपक गुरूजी,
जलाई हो दियो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
लख़ हो चौरासी जिवडो भटक ने आयो,
अबकी चौरासी गुरूजी,
म्हारी चौरासी गुरूजी,
छुड़ा हो दीज्यो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
अब को जीवन हो गुरूजी,
म्हारो अबको जीवन,
संवार हो दीज्यो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
इना हो सेवक की अरज गुसाई,
ए आवागमन को बंधन,
म्हारो आवागमन को बंधन,
छुड़ाई हो दीज्यो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
मंत्र मुलम गुरु वाक्यम,
मोक्ष मुलम गुरु कृपा,
गुरु बिन ज्ञान ना उपजे,
गुरु बिना मिले ना मोक्ष,
गुरु बिना लखे कोई सत को,
गुरु बिन मिटे ना दोष।
ए लाख लाख वंदन तमने
कोटि कोटि वंदन
गुरु गम का सागर तमने
लाख लाख वंदन
अज्ञान जिवोडो
गुरु जी शरण में आयो
ए ज्ञान को दीपक गुरु जी
जनाए हो दीजो
गुरु गम का सागर तमने
लाख लाख वंदन
अज्ञानी जीवडो चरणों चरणों में आयो
ज्ञान को दीपक गुरूजी,
जलाई हो दियो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
लख़ हो चौरासी जिवडो भटक ने आयो,
अबकी चौरासी गुरूजी,
म्हारी चौरासी गुरूजी,
छुड़ा हो दीज्यो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
अब को जीवन हो गुरूजी,
म्हारो अबको जीवन,
संवार हो दीज्यो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
इना हो सेवक की अरज गुसाई,
ए आवागमन को बंधन,
म्हारो आवागमन को बंधन,
छुड़ाई हो दीज्यो,
गुरु गम का सागर तमने,
लाख लाख वंदन।
एजी ध्यान मुलम गुरु मूर्ति,
मंत्र मुलम गुरु वाक्यम,
मोक्ष मुलम गुरु कृपा,
गुरु बिन ज्ञान ना उपजे,
गुरु बिना मिले ना मोक्ष,
गुरु बिना लखे कोई सत को,
गुरु बिन मिटे ना दोष।
प्रह्लाद सिंह टिपानिया का संगीत भारत और दुनिया भर में व्यापक रूप से लोकप्रिय है। कबीर की कविताओं की उनकी भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ लाखों लोगों के दिलों को प्रेरित और छूती रहती हैं।
Prahlad Singh Tipanya | Laakh Laakh Vandan tumne Koti Koti Vandan | Kabir Bhajan
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Author - Saroj Jangir
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