सावन लाग्यो भादवो जी तो बरसन लाग्यो सोंग
सावन लाग्यो भादवो जी तो बरसन लाग्यो मेह सोंग
सावन लाग्यो भादवो जी
मोरया
सावन लाग्यो भादवो जी
यो तो बरसन लाग्यो मेह , बनिसा
गोरी रा मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे
मोरया
सावन लाग्यो भादवो जी
यो तो बरसन लाग्यो मेह , बनिसा
गोरी रा मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे
झट सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे
म्हारा सासूजी बनाबा ने जाए, बनिसा
मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे
म्हारा सासूजी बनाबा ने जाए, बनिसा
मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे
झट सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
उगण लागी बाजरी रे म्हारी उगन लागी बाजरी रे
म्हारी उगण लागी जवार ,
झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
उगण लागी बाजरी रे म्हारी उगन लागी बाजरी रे
म्हारी उगण लागी जवार ,
बनिसा
मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे
मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे
झट सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे
झट सियाळो लाग्यो रे
काटूं मैं काटूं बाजरी रे म्हारी काटूं मैं काटूं बाजरी रे
म्हारी काटूँ मैं काटूं जवार ,
काटूं मैं काटूं बाजरी रे म्हारी काटूं मैं काटूं बाजरी रे
म्हारी काटूँ मैं काटूं जवार ,
बनिसा
मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
आळ्या में पड़गी बाजरी जी म्हारी आळ्या में पड़गी बाजरी जी
म्हारी कोठा में पड़गी जवार , बनिसा
मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे
मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे
आळ्या में पड़गी बाजरी जी म्हारी आळ्या में पड़गी बाजरी जी
म्हारी कोठा में पड़गी जवार , बनिसा
मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे
झट सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे
झट सियाळो लाग्यो रे
म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे
म्हारा सासूजी मनाबा ने जाए , बनिसा
मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे
म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे
म्हारा सासूजी मनाबा ने जाए , बनिसा
मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे
झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे
सावन लाग्यो भादवो | Indra Dhavsi | Chomaso Aayo Re | Nutan Gehlot | Latest Rajasthani Songs
❖ Song : Chomaso
❖ Singer : Indra Dhavsi
❖ Lyrics : Traditional
❖ Music : Mukesh Choudhary
❖ Recording : Balaji Recording Studio
❖ Music Label : Surana Film Studio
❖ Sub Category : Regional Pop
❖ Category : Sawan Song
❖ Director : Gulab Choudhary
❖ Produced : Surana Film Studio
❖ Singer : Indra Dhavsi
❖ Lyrics : Traditional
❖ Music : Mukesh Choudhary
❖ Recording : Balaji Recording Studio
❖ Music Label : Surana Film Studio
❖ Sub Category : Regional Pop
❖ Category : Sawan Song
❖ Director : Gulab Choudhary
❖ Produced : Surana Film Studio
यह राजस्थानी लोकगीत "सावन लाग्यो भादवो जी" एक पारंपरिक सावन-भादवो (चौमासा) से जुड़ा ग्रामीण गीत है, जो मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा गाया जाता है। यह बरसात के मौसम (सावन-भादों) के आगमन का जश्न मनाता है, खेती-बाड़ी की हरियाली और फसल की खुशी व्यक्त करता है, लेकिन साथ ही ससुराल में बहुओं की छोटी-मोटी नाराजगी या रूठने-मनाने की मजेदार बात भी जोड़ता है।
यह गीत पंक्ति दर पंक्ति हिंदी में अर्थ के साथ पैराग्राफ रूप में समझें:
गीत की शुरुआत में गायिका कहती है कि सावन और भादवो (भादों) का महीना लग गया है, बारिश शुरू हो गई है। "यो तो बरसन लाग्यो मेह" का मतलब है कि अब अच्छी बारिश होने लगी है। "बनिसा मोरिया रे" जैसे शब्द लोकगीतों में आमतौर पर सखी या साथी को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जैसे "अरे सखी मोरी"।
बार-बार दोहराया जाने वाला मुखड़ा "झट चौमासो लाग्यो रे, झट सियाळो लाग्यो रे" का अर्थ है कि चौमासा (बरसात के चार महीने—सावन, भादों, आश्विन, कार्तिक) और सियालो (सर्दी का मौसम) बहुत जल्दी-जल्दी लग गया है। "झट" का मतलब है जल्दी या अचानक। यानी मौसम बदलाव बहुत तेजी से आ गया।
गीत में बहू की शिकायत है कि "म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे" — मेरी देवरानी (छोटी देवरानी) और जेठानी (बड़ी जेठानी) मुझसे रूठ गई हैं या नाराज हो गई हैं। और "म्हारा सासूजी मनाबा ने जाए" — मेरी सासूजी को उन्हें मनाने जाना पड़ेगा। यहाँ हल्का-फुल्का घरेलू मजाक और परिवार में बहुओं के बीच की छोटी-मोटी नोंक-झोंक का जिक्र है, जो सावन-भादों के मौसम में ज्यादा दिखती है (क्योंकि बारिश में घर में ज्यादा समय बिताना पड़ता है)।
फिर गीत खेती की ओर मुड़ता है: "उगण लागी बाजरी रे, म्हारी उगण लागी जवार" — मेरी बाजरी (बाजरा) और ज्वार की फसल उगने लगी है। बारिश के कारण खेत हरे-भरे हो गए हैं।
इसके बाद "काटूं मैं काटूं बाजरी रे, म्हारी काटूं मैं काटूं जवार" — अब मैं बाजरा और ज्वार की कटाई करूँगी। यानी फसल पक गई है, कटाई का समय आ गया।
यह गीत पंक्ति दर पंक्ति हिंदी में अर्थ के साथ पैराग्राफ रूप में समझें:
गीत की शुरुआत में गायिका कहती है कि सावन और भादवो (भादों) का महीना लग गया है, बारिश शुरू हो गई है। "यो तो बरसन लाग्यो मेह" का मतलब है कि अब अच्छी बारिश होने लगी है। "बनिसा मोरिया रे" जैसे शब्द लोकगीतों में आमतौर पर सखी या साथी को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जैसे "अरे सखी मोरी"।
बार-बार दोहराया जाने वाला मुखड़ा "झट चौमासो लाग्यो रे, झट सियाळो लाग्यो रे" का अर्थ है कि चौमासा (बरसात के चार महीने—सावन, भादों, आश्विन, कार्तिक) और सियालो (सर्दी का मौसम) बहुत जल्दी-जल्दी लग गया है। "झट" का मतलब है जल्दी या अचानक। यानी मौसम बदलाव बहुत तेजी से आ गया।
गीत में बहू की शिकायत है कि "म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे" — मेरी देवरानी (छोटी देवरानी) और जेठानी (बड़ी जेठानी) मुझसे रूठ गई हैं या नाराज हो गई हैं। और "म्हारा सासूजी मनाबा ने जाए" — मेरी सासूजी को उन्हें मनाने जाना पड़ेगा। यहाँ हल्का-फुल्का घरेलू मजाक और परिवार में बहुओं के बीच की छोटी-मोटी नोंक-झोंक का जिक्र है, जो सावन-भादों के मौसम में ज्यादा दिखती है (क्योंकि बारिश में घर में ज्यादा समय बिताना पड़ता है)।
फिर गीत खेती की ओर मुड़ता है: "उगण लागी बाजरी रे, म्हारी उगण लागी जवार" — मेरी बाजरी (बाजरा) और ज्वार की फसल उगने लगी है। बारिश के कारण खेत हरे-भरे हो गए हैं।
इसके बाद "काटूं मैं काटूं बाजरी रे, म्हारी काटूं मैं काटूं जवार" — अब मैं बाजरा और ज्वार की कटाई करूँगी। यानी फसल पक गई है, कटाई का समय आ गया।
