गौरा जी ब्याहने आये हैं शिवजी दूल्हा बनके
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
दूल्हा निराले बने हैं डमरू वाले,
दूल्हा निराले बने हैं डमरू वाले,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी को लगा हल्दी चन्दन का उबटन,
गौरा जी को लगा हल्दी चन्दन का उबटन,
गौरा जी को लगा हल्दी चन्दन का उबटन,
गौरा जी को लगा हल्दी चन्दन का उबटन,
अंग भभूत रमाये हैं, भोले डमरू वाले,
अंग भभूत रमाये हैं, भोले डमरू वाले,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी के शीश पे स्वर्ण मुकुट है,
गौरा जी के शीश पे स्वर्ण मुकुट है,
गौरा जी के शीश पे स्वर्ण मुकुट है,
गौरा जी के शीश पे स्वर्ण मुकुट है,
चंदा का मुकुट लगाए हैं, भोले डमरू वाले,
चंदा का मुकुट लगाए हैं, भोले डमरू वाले,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी माथे, कुमकुम की बिंदिया,
गौरा जी माथे, कुमकुम की बिंदिया,
गौरा जी माथे, कुमकुम की बिंदिया,
गौरा जी माथे, कुमकुम की बिंदिया,
माथे त्रिपुण्ड बनाये हैं, भोले डमरू वाले,
माथे त्रिपुण्ड बनाये हैं, भोले डमरू वाले,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी के कानों में सोने के झुमके,
गौरा जी के कानों में सोने के झुमके,
गौरा जी के कानों में सोने के झुमके,
गौरा जी के कानों में सोने के झुमके,
कानों में बिच्छू सजाएं हैं, भोले डमरू वाले,
कानों में बिच्छू सजाएं हैं, भोले डमरू वाले,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी गले में सोने का हार है,
गौरा जी गले में सोने का हार है,
गौरा जी गले में सोने का हार है,
गौरा जी गले में सोने का हार है,
नाग गले लिपटायें हैं, भोले डमरू वाले,
नाग गले लिपटायें हैं, भोले डमरू वाले,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ने ओढ़ी है रेशम की चुनरी,
गौरा जी ने ओढ़ी है रेशम की चुनरी,
गौरा जी ने ओढ़ी है रेशम की चुनरी,
गौरा जी ने ओढ़ी है रेशम की चुनरी,
पहने बाघंबर का दोशाला, भोले डमरू वाले,
पहने बाघंबर का दोशाला, भोले डमरू वाले,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गौरा जी ब्याहने आये हैं,
शिवजी दूल्हा बन के,
गोरा को ब्याहने आये गयो रे मेरा भोला भंडारी || Bhajan Sandhya || Latest Shiv Parvati Bhajan
Thank You So Much By : Bhajan Sandhya
शिव और पार्वती का विवाह एक ऐसी पौराणिक कथा है, जो न केवल भक्ति और प्रेम की गहराई को दर्शाती है, बल्कि सृष्टि के मूल तत्वों—पुरुष और प्रकृति—के संतुलन को भी प्रतीकित करती है। पार्वती ने अपने अटूट संकल्प और तपस्या के बल पर शिव जैसे संन्यासी और वैरागी को अपने प्रेम में बाँध लिया, जो यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति और समर्पण असंभव को भी संभव बना सकता है। यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि शक्ति और चेतना का संगम है, जो सृष्टि की रचना, पालन और संहार के चक्र को पूर्ण करता है। शिव की बारात, जिसमें विविध और विचित्र प्राणी शामिल थे, यह संदेश देती है कि ईश्वर की सत्ता में सभी प्राणी समान हैं, चाहे वे कितने भी भिन्न क्यों न हों। यह घटना भक्तों को यह सिखाती है कि सच्चा प्रेम और विश्वास बाहरी रूप या सामाजिक बंधनों से परे होता है, और यह हृदय की शुद्धता और समर्पण पर आधारित होता है।
