हमने आँगन नहीं बुहारा कैसे आयेंगे भगवान

हमने आँगन नहीं बुहारा कैसे आयेंगे भगवान

 
हमने आँगन नहीं बुहारा कैसे आयेंगे भगवान लिरिक्स Hamne Aangan Nahi Buhara Kaise Aayenge Bhagwan Lyrics

हमने आँगन नहीं बुहारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ।
मन का मैल नहीं धोया तो,
कैसे आयेंगे भगवान् ॥

हर कोने कल्मष-कषाय की,
लगी हुई है ढेरी ।
नहीं ज्ञान की किरण कहीं है,
हर कोठरी अँधेरी ।
आँगन चौबारा अँधियारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ॥

हृदय हमारा पिघल न पाया,
जब देखा दुखियारा ।
किसी पन्थ भूले ने हमसे,
पाया नहीं सहारा ।
सूखी है करुणा की धारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ॥

अन्तर के पट खोल देख लो,
ईश्वर पास मिलेगा ।
हर प्राणी में ही परमेश्वर,
का आभास मिलेगा ।
सच्चे मन से नहीं पुकारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ॥

निर्मल मन हो तो रघुनायक,
शबरी के घर जाते ।
श्याम सूर की बाँह पकड़ते,
शाग विदुर घर खाते ।
इस पर हमने नहीं विचारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ॥

हमने आँगन नहीं बुहारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ।
मन का मैल नहीं धोया तो,
कैसे आयेंगे भगवान् ॥



Hamne aangan nahi buhara (bhajan) by Maithili Thakur, Rishav Thakur and Ayachi Thakur


Siner : Maithili Thakur

मन का आंगन साफ किए बिना, श्रीकृष्णजी और श्रीराम कैसे आएंगे? जब तक मन की गंदगी—जैसे लोभ, क्रोध, और अहंकार—न धुल जाए, तब तक भगवान का आलोक कैसे बरसेगा? ये मन का मैल ही है जो हमें अंधेरे में रखता है, जैसे कोई घर बरसों से बंद कोठरी में धूल जमा हो। हर कोने में बुरे विचारों की ढेरियां लगी हैं, और ज्ञान की किरण के बिना मन की कोठरियां अंधेरी पड़ी हैं। बिना मन की शुद्धि के, भगवान का स्वागत कैसे होगा? जैसे कोई मेहमान को बुलाए, पर घर को सजाए नहीं, वैसे ही मन का अंधेरा भगवान को आने से रोकता है।

जब कोई दुखी या भटका हुआ सामने आता है, और हमारा दिल उसके लिए नहीं पिघलता, तो करुणा की धारा सूख जाती है। बिना दूसरों के दुख में सहारा देने के, भगवान का रास्ता कैसे खुलेगा? जैसे कोई प्यासे को पानी न दे, वैसे ही करुणा के बिना मन सूना रहता है। अंतर्मन के पट खोलो, तो हर प्राणी में भगवान की झलक दिखती है। सच्चे मन से पुकारो, तो वो पास ही मिलते हैं। जैसे शबरी के सच्चे प्रेम ने श्रीराम को बुला लिया, या सुदामा की सादगी ने श्रीकृष्णजी को उनके घर खींच लिया। बिना इस सच्चाई को अपनाए, भगवान का आगमन कैसे होगा?


रघुनायक, जिसका शाब्दिक अर्थ है "रघुकुल के नायक," भगवान राम के लिए एक विशेषण है जो उनके पराक्रम और मर्यादा को दर्शाता है। यह नाम दो शब्दों से मिलकर बना है: रघु, जो इक्ष्वाकु वंश के एक महान और प्रतापी राजा थे, और नायक, जिसका अर्थ होता है नेता या वीर। इस प्रकार, रघुनायक भगवान राम के उस स्वरूप को दर्शाता है जो न केवल एक वीर योद्धा थे, बल्कि अपने कुल के सर्वोच्च आदर्शों, मर्यादाओं और परंपराओं के प्रतीक भी थे। यह नाम उनकी वीरता, नेतृत्व और उनके पुरुषोत्तम चरित्र का सम्मान करता है, जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देता है।

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