मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द भजन
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द भजन
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्दमेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
श्री राम के चरणविंद, राघव के चरणारविन्द
श्री राम के चरणविंद, राघव के चरणारविन्द
श्री राम के चरणविंद, राघव के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार सीता राम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
मेरे तो आधार राधा श्याम के चरणारविन्द
mere to adhar sankirtan by p p shri ramesh bhai oza ji
मेरे जीवन का एकमात्र आधार (सहारा, टेक, जीवन का मूल) सीता-राम के चरणारविंद (कमल जैसे कोमल चरण) हैं। बार-बार दोहराव से यह भाव गहरा होता है कि संसार की कोई भी वस्तु, व्यक्ति या सुख-दुख स्थायी नहीं, केवल रघुनाथ (राम) और उनकी अर्धांगिनी सीता के चरण ही सच्चा आधार हैं। राम और सीता को साथ में याद करना मर्यादा पुरुषोत्तम और उनकी पत्नी के युगल रूप की महिमा दर्शाता है, जो भक्त के लिए परम आश्रय हैं।
इसी प्रकार, भजन में राधा-श्याम (राधा-कृष्ण) के चरणारविंद को भी आधार बताया गया है। यह राधा-कृष्ण की प्रेममयी लीला और वात्सल्य-माधुर्य भक्ति की अभिव्यक्ति है। भक्त कहता है कि मेरे लिए राधा-श्याम के चरण ही सब कुछ हैं – जीवन का सहारा, मोक्ष का द्वार, और प्रेम का स्रोत। दोनों युगलों (सीता-राम और राधा-श्याम) को एक साथ गाकर भक्त राम-कृष्ण एकत्व (एक ही परमात्मा के अलग-अलग रूप) का संदेश देता है, और अंत में बार-बार दोहराकर यह दृढ़ करता है कि चाहे राम भक्ति हो या कृष्ण भक्ति, दोनों के चरण ही मेरे एकमात्र आधार हैं – इससे बढ़कर कोई दूसरा सहारा नहीं।
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