पौणाहारी सिर उते हथ धरदा भजन

पौणाहारी सिर उते हथ धरदा भजन

पौणाहारी जोगी मेरे सच्ची ने कमाल,
लगे जेहड़े चरनी ते होंगे ने निहाल,
दिन रात जोगी दे गुण गाउँदा रह,
योगी भी हमेशा तेरे रहुगा पख दा,
उस बंदे कोलो दुःख दूर रेहन सारे,
पौणाहारी सिर उते हथ धरदा.....
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भव सागरा च योगी पार भी लगाउँदै ने,
सुते होये भागा नु एह बाबा जी जगाउंदे ने,
छड़ के तू दुनिया नु चरना च आजा,
दूधाधारी सरिया दी बाह फड् दा,
पौणाहारी सिर उते हथ धरदा,
इक मन होके जेहड़ा इस दर आया है,
बाबा जी कुली दी था महल भी बनाया है,
केहड़े केहड़े दसा हड़े कोटक न्यारे,
जंदा नहीं निराश एथो झोली भरदा,
पौणाहारी सिर उते हथ धरदा,
इस दुनिया दी कोई चीज नहीं न्यारी,
योगी झोली पाउँदा नवी नैंसी प्यारी,
टूथ पूठ धन नाल भर दू खजाने हर वाजी जीतदा नहियो हरदा,
पौणाहारी सिर उते हथ धरदा,
हाथ रखी सैयां हुन करि न तू दूर नहीं,
सनी कदे कदे हो जांदा मजबूर जी,
सुमन नु लब दी न दर बिना तोई,
घर पैसिया तो बिना नहीं सरदा,
पौणाहारी सिर उते हथ धरदा,



Jogi Hath Doraan ( जोगी हथ डोरां ) Sukha Ram Saroa - Baba Balaknath Bhajan 2023 - Studio Beats

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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