कर्म सकल तव विलास लोक अहम भजन
कर्म सकल तव विलास भजन
कर्म सकल तव विलास, लोक अहम केवल हास,
हस्ती किच बिच ड़ारो, पंगु पार गिरी साहास,
प्रभु पद में कोई बैठावो, पतित का तो हक उलास,
यंत्र बद्ध किनी मोहे, चलत करो नव प्रगास,
तू धर्मी देह माही, फैलावो चो दिस उजास,
रथ समान मोही बनाए, चलावो हाथ तुमरे रास,
करो कर्म अपनी और, ढूँढो सकल जग की आस,
कर्म सकल तव विलास, लोक अहम केवल हास,
हस्ती किच बिच ड़ारो, पंगु पार गिरी साहास,
प्रभु पद में कोई बैठावो, पतित का तो हक उलास,
यंत्र बद्ध किनी मोहे, चलत करो नव प्रगास,
तू धर्मी देह माही, फैलावो चो दिस उजास,
रथ समान मोही बनाए, चलावो हाथ तुमरे रास,
करो कर्म अपनी और, ढूँढो सकल जग की आस,
हस्ती किच बिच ड़ारो, पंगु पार गिरी साहास,
प्रभु पद में कोई बैठावो, पतित का तो हक उलास,
यंत्र बद्ध किनी मोहे, चलत करो नव प्रगास,
तू धर्मी देह माही, फैलावो चो दिस उजास,
रथ समान मोही बनाए, चलावो हाथ तुमरे रास,
करो कर्म अपनी और, ढूँढो सकल जग की आस,
कर्म सकल तव विलास, लोक अहम केवल हास,
हस्ती किच बिच ड़ारो, पंगु पार गिरी साहास,
प्रभु पद में कोई बैठावो, पतित का तो हक उलास,
यंत्र बद्ध किनी मोहे, चलत करो नव प्रगास,
तू धर्मी देह माही, फैलावो चो दिस उजास,
रथ समान मोही बनाए, चलावो हाथ तुमरे रास,
करो कर्म अपनी और, ढूँढो सकल जग की आस,
Karmsakal Tav Vilas | कर्मसकल तव विलास | Jagjit Singh | Maa | Saregama Bhakti
Listen to "Karmsakal Tav Vilas" in Jagjit Singh's voice from the album Maa.
ईश्वर की अनन्त लीला को स्वीकार करते हुए यह भाव स्पष्ट होता है कि इस संसार में मनुष्य का अहंकार केवल एक मिथ्या हास के समान है, क्योंकि वास्तव में समस्त कर्म उस परमात्मा की ही क्रीड़ा का विस्तार हैं। वह परमेश्वर इतना सामर्थ्यवान है कि वह कीचड़ में फंसे हाथी को निकाल सकता है और एक पंगु व्यक्ति को साहस प्रदान कर पर्वत पार करा सकता है, जो यह दर्शाता है कि उसकी कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है।
एक भक्त के नाते हम स्वयं को केवल एक यंत्र के रूप में देखते हैं जिसे प्रभु ने निर्मित किया है, और अब प्रार्थना यही है कि वे हमारे भीतर चेतना का नया प्रकाश भर दें ताकि इस नश्वर देह में धर्म और दिव्यता का उजाला चारों दिशाओं में फैल सके। अपने अस्तित्व को एक रथ मानकर हम उसकी डोर पूर्णतः ईश्वर के हाथों में सौंप देते हैं, इस अटूट विश्वास के साथ कि वही सारथी बनकर हमें सही मार्ग पर ले जाएंगे और हमारे माध्यम से जगत के कल्याण का वह कार्य सिद्ध करेंगे जिसकी प्रतीक्षा समस्त संसार कर रहा है।
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Author - Saroj Jangir
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