मन चल वृन्दावन चलिए जित्थे रहंदे सांवल भजन

मन चल वृन्दावन चलिए जित्थे रहंदे सांवल शाह भजन

 
मन चल वृन्दावन चलिए भजन लिरिक्स Man Chal Vrindavan Chaliye Bhajan Lyrics

मन चल वृन्दावन चलिए, जित्थे रहंदे सांवल शाह,
जित्थे रहंदे ने बेपरवाह, जित्थे यमुना पई ठाठा मारदी,
मन तू वी जाके गोता ला, जित्थे रिश्ते ना नाते ना अपने,
जित्थे ना कोई धूप है ना छा है, जित्थे ना कोई बहन भरा,
जित्थे निन्देया ना चुगली ना उस्तत्ति, जित्थे प्रेम दा वगे दरेआ,
जित्थे गोपी ग्वाल पाए झुमदे, मेरे मन नू वी चडिया चा,
जित्थे मस्त मलंग पए झुमदे, तू वी राधे राधे गा,
जित्थे यमुना पई ठा ठा मारदी,
जित्थे यमुना पई ठा ठा मारदी,
तू भी रज रज डुब्बियाँ ला,
मन रज गोते ला,
मन चल वृन्दावन चलिए,
मन चल वृन्दावन चलिए,

वृन्दावन सो वन नहीं, नंदगावं सम गाँव,
वंशीवट सम वट नहीं, कृष्ण नाम सम नाम,
गीत रसीले श्याम के मेरे जीवन के आधार,
छोड़ जगत जंजाल सभी कर मोहन सो प्यार,
कर मोहन सो प्यार, सुधार ले मानस सही,
तेरो लाभ यही है जगत में भज ले परम सनेही,
मात पिता बंधू सज्जन सब स्वार्थ के मीत,
तू हिय में मस्ती भर कर प्यारे, गा मोहन के गीत,
मन चल वृन्दावन चलिए, जित्थे रहंदे सांवल शाह,

 
ओ मना चल वृन्दावन चलिये जिथे रहन्दे ने सावल शाह !! कड़कड़डूमा नई दिल्ली !! 8.12.2018 !! बाँसुरी
 
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☛ Video Name: ओ मना चल वृन्दावन चलिये जिथे रहन्दे ने सावल शाह
☛ Singer Name: Sushri Poornima Ji (Poonam Didi)
© Copyright: Bansuri (बाँसुरी)
Watch “ओ मना चल वृन्दावन चलिये जिथे रहन्दे ने सावल शाह" by बाँसुरी
 
दुनिया ने साथ छोड़ दिया, अपनों ने धोखा दिया, जो अपना कहते थे उन्होंने ही दिल पर जख्मों की बारिश कर दी। हर कोना चीर दिया, हर सपना तोड़ दिया, और अब दिल तड़प रहा है, आँसू टपक रहे हैं, कुछ भी अच्छा नहीं लगता। जीवन बिना तेरे जनम-जनम की सजा सा लगता है, जैसे कोई अंधेरी कोठरी में बंद हो गया हो। मेरे बाबा, तू ही तो आखिरी सहारा था, तू ही तो हमदम था, तू ही तो पिया था। फिर क्यों खफा है? क्या गुनाह कर बैठा हूँ मैंने, जो तू भी मुँह फेर ले रहा है? बस एक बार बता दे, क्यों दूर खड़ा है, क्यों हाथ नहीं बढ़ा रहा।

शरण में आया हूँ तेरी, दया की भीख माँगने। तड़प रही है ये जान तेरी याद में, हर सांस पुकार रही है। न छोड़ना साथ माँही, ये तन्नू की आखिरी दुआ है। दुनिया ने लूट लिया सब कुछ, पर तेरी याद ने जीवित रखा है। अगर तू भी रूठ गया तो ये दिल कहाँ जाएगा? बस एक नजर, एक स्पर्श, एक मुस्कान – बस इतना काफी है कि सारे जख्म भर जाएँ, सारी सजा माफ हो जाए। मेरे बाबा, खफा मत होना, तू ही तो मेरा सब कुछ है। तू पास आ जा, ये जीवन फिर से हँसने लगेगा। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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