जीवन बीन मधुर न बाजे झूठे पड़ गये तार
स्ट्रीट सिंगर 1938 की हिंदी प्रशिद्ध फ़िल्म है जिसका निर्देशन फणी मजूमदार ने किया है। यह न्यू थियेटर्स कलकत्ता द्वारा निर्मित फिल्म है और निर्देशक के रूप में फणी मजूमदार की पहली हिंदी फिल्म थी जो काफी पसंद की गई। यह फिल्म उसी साल बंगाली में सती के रूप में बनाई गई थी। इसमें के एल सहगल, कानन देवी, जगदीश सेठी और बिक्रम कपूर ने अभिनय किया। आर सी बोराल द्वारा संगीतबद्ध गीत आरज़ू (आरज़ू) लकनवी द्वारा लिखे गए थे। दो स्ट्रीट ऑर्चिन गायन का सपना देखते हैं और इसे कलकत्ता में थिएटर की ग्लैमरस दुनिया में बड़ा बनाते हैं। यहीं उनका आकर्षण एक लड़की के साथ दिखाया गया है जिसके साथ वह बड़े होते हैं, लड़की के प्रति आकर्षण और फिर थिएटर से मोहभंग के कारण अंत में दोनों गाँव में अपनी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय लेते हैं।
जीवन बीन मधुर न बाजे झूठे पड़ गये तार
बिगड़े काठ से काम बने क्या मेघ बजे न मल्हार
पंचम छेड़ो मध्यम बोले खरज बने गन्धार
बीन के झूठे पड़ गये तार
जीवन बीन मधुर न बाजे झूठे पड़ गये तार
बीन के झूठे पड़ गये तार
इन तारो को खोलो इन तरभो को फेंको फेंको
उत्तम तार नयी तरभे हो, तब हो नया श्रिंगार
इस तरभे से जो सुर बोले गूंज उठे संसार
बीन के झूठे पड़ गये तार
जीवन बीन मधुर न बाजे झूठे पड़ गये तार
बीन के झूठे पड़ गये तार
बजने को है गूंज नगाड़ा होना है सबसे छुटकारा
अपना जो है उसे समझ लो वह भी नहीं हमारा
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जीवन बीन मधुर न बाजे झूठे पढ़ गये तार
बिगड़े काठ से काम बने क्या मेघ बजे न मल्हार,
पंचम छेड़ो मध्यम बोले खरज बने गन्धार,
बीन के झूठे पढ़ गये तार
जीवन बीन मधुर न बाजे झूठे पढ़ गये तार
बीन के झूठे पढ़ गये तार
इन तारो को खोलो इन तरभो को फेंको फेंको
उत्तम तार नयी तरभे हो, तब हो नया श्रिंगार
इस तरभे से जो सुर बोले गूंज उठे संसार
बीन के झूठे पढ़ गये तार
जीवन बीन मधुर न बाजे झूठे पढ़ गये तार
बीन के झूठे पढ़ गये तार
बजने को है गूंज नगाड़ा होना है सबसे छुटकारा,
अपना जो है उसे समझ लो वह भी नहीं हमारा,
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