दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो भजन

दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो रे भजन

 
दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो रे लिरिक्स Deevo Re Deevo Re Pabhu Manglik Deevo Lyrics

दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो रे,
आरती उतारण बहु चिरंजीवो रे,

सोहामणुं घेर पर्व दीवाळी,
अम्बर खेले अमरा बाळी,
दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो रे,

दीपाळ भनें एणे कुल अजुआळी,
भावें भगतें विघन निवारी,
दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो रे,
दीपाळ भणे एणे ए कलिकाळे,
आरती उतारी राजा कुमारपाळे,
दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो रे,
अम घेर मंगलिक तुम घेर मंगलिक,
मंगलिक चतुर्विध संघने हौजों,
दीवो रे दीवो रे प्रभु मंगलिक दीवो रे,

lyrics in Gujrati

દીવો રે દીવો પ્રભુ મંગલિક દીવો;
આરતી ઉતારણ બહુ ચિરંજીવો. દીવો,
સોહામણું ઘેર પર્વ દીવાળી,
અંબર ખેલે અમરા બાળી. દીવો,
દીપાળ ભણે એણે કુળ અજવાળી,
ભાવે ભગતે વિઘન નિવારી. દીવો,
દીપાળ ભણે એણે એ કલિકાળે,
આરતી ઉતારી રાજા કુમારપાળે. દીવો,
અમ ઘેર મંગલિક તુમ ઘેર મંગલિક,
મંગલિક ચતુર્વિધ સંઘને હોજો. દીવો,
 

 
Divo Re Divo Prabhu
 
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प्रभु का मंगलिक दीवा उतारते हुए जैसे सारी बुराइयाँ दूर हो जाती हैं, और चिरंजीवी होने की कामना दिल से निकलती है। घर सजा होता है, आकाश में देवी-देवता जैसे खेलते हैं, अमर बालियाँ नाचती हैं। भाव से भक्त जब आरती उतारता है, तो कुल की रोशनी बढ़ जाती है, हर विघ्न दूर हो जाता है। कलियुग में भी राजा कुमारपाल ने जो आरती उतारी, वो आज भी याद आती है—उसकी भक्ति ने दिखाया कि सच्चा मंगल सबके लिए है।

अब घर में मंगल हो, तुम्हारे घर में मंगल हो, चारों प्रकार के संघ—साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका—सब पर मंगल बरसे। ये दीवा सिर्फ तेल का नहीं, भक्ति का है, जो हर दिल को रोशन करता है, हर जीवन को शुभ बनाता है। आरती उतारते वक्त जो भाव आता है, वो अमर रहता है, सबको खुशी देता है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय जिनेंद्र।
 
Jain Aarti - Divo Divo Divo Re Prabhu Manglik Divo Re | Jai Jinendra
Aarti: Divo Re Divo Prabhu
Album: Jain Aartiyan
Singer: Kishore Manraja
Label: Gunjan Music 
 
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