हँसा निकल गया पिंजरे से भजन
हँसा निकल गया पिंजरे से खाली पड़ी रहे तस्वीर कबीर भजन
राम नाम की लूट है, लुटी जा तो लूट,
अंत समय पछतावेगा, जब प्राण जायेंगे छूट,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
पड़ी रवे तस्वीर हो खाली पड़ी रवे तस्वीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
जम के जीव को लेने आये, तनिक धरे ना धीर,
मार के सोट्टा प्राण छुड़ा ले , बहे नयन से नीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
भोत मनाये देवी देवता, भोत (बहुत) मनाये पीर,
अंत समय कोई काम ना आवे, जान पड़े आख़िर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
कोई रोवे, कोई तन नुहावै, कोई ओढ़ावे चीर,
चार जणे रल मिल मत्ता उपायो, ले गए मरघट तीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
भाग करम के कोय ना जाणे, संग चले न शरीर,
जा जंगळ में चिता चिनाई, कह गए संत कबीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
अंत समय पछतावेगा, जब प्राण जायेंगे छूट,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
पड़ी रवे तस्वीर हो खाली पड़ी रवे तस्वीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
जम के जीव को लेने आये, तनिक धरे ना धीर,
मार के सोट्टा प्राण छुड़ा ले , बहे नयन से नीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
भोत मनाये देवी देवता, भोत (बहुत) मनाये पीर,
अंत समय कोई काम ना आवे, जान पड़े आख़िर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
कोई रोवे, कोई तन नुहावै, कोई ओढ़ावे चीर,
चार जणे रल मिल मत्ता उपायो, ले गए मरघट तीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
भाग करम के कोय ना जाणे, संग चले न शरीर,
जा जंगळ में चिता चिनाई, कह गए संत कबीर,
हँसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रहे तस्वीर,
हंसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रही तस्वीर || 1-भगत रामनिवास || सतगुरु भजन Hansa Nikal Gaya Pinjare Se Bhajan by Bhagat Ramniwas ji
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जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य यह नहीं कि हम सांस ले रहे हैं, बल्कि यह कि हमें “नाम” का अवसर मिला है। यह “राम नाम की लूट” कोई सांसारिक व्यापार नहीं, बल्कि आत्मा की मुक्ति का द्वार है। कबीर का भाव यहाँ हमें झकझोरता है—कि जिस क्षण यह शरीर टूट जाएगा, तब कोई धन, कोई संबंध, कोई उपासना नहीं चलेगी, बस वही नाम साथ जाएगा जिसे सच्चे भाव से जपा गया हो। यह लूट उस साधक की पहचान है, जो स्थायी सत्य को पा लेता है, इससे पहले कि जीवन का सौदा समाप्त हो जाए।
समय रहते अपने भीतर उस नाम को पहचानो, जो प्राणों का सच्चा सहचर है। जीवन जब “राम” में रम जाता है, तब मृत्यु भी उत्सव बन जाती है, और जो मृत्यु से पहले मरना जान लेता है, वही अमरत्व का रहस्य समझ पाता है।
जब यम के दूत हमें लेने आते हैं, तो वह एक भी पल का धीरज नहीं रखते और बड़ी ही कठोरता से प्राणों को शरीर से खींच लेते हैं, जिससे आँखों से आँसू बहने लगते हैं। इस मुश्किल घड़ी में, जीवन भर मनाए गए देवी-देवता या पीर-फकीर भी काम नहीं आते, क्योंकि अंत में तो जाना ही पड़ता है। यह संसार कितना भी रोए, शरीर को नहलाए या नए कपड़े ओढ़ाए, लेकिन चार लोग मिलकर इसे मरघट की ओर ले जाते हैं और वहीं चिता सजाते हैं। यह संत कबीर की वाणी हमें यही सीख देती है कि भाग और कर्मों का लेखा-जोखा कोई नहीं जानता, और न ही यह शरीर हमारे साथ चलता है।
हंसा निकल गया पिंजरे से, खाली पड़ी रही तस्वीर || भगत रामनिवास || सतगुरु भजन
Album - सतगुरु भजन
Singer : भगत रामनिवास Bhagat Ramniwas
Album - सतगुरु भजन
Singer : भगत रामनिवास Bhagat Ramniwas
