जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया भजन
जीवन खतम हुआ तो, जीने का ढंग आया,
जब शम्मां बुझ गई तो, महफ़िल में रंग आया,
जीवन ख़त्म हुआ तो, जीने का ढंग आया,
गाड़ी चली गई तो, घर से चला मुसाफ़िर,
फिर मायूस हाथ मलता, वापस बेरंग आया,
जीवन खतम हुआ तो, जीने का ढ़ंग आया,
जीवन खतम हुआ तो, जीने का ढ़ंग आया,
मन की मशीनरी ने, तब ठीक चलना सीखा,
जब इस बूढ़े तन के हरेक, पुरज़े में जँग आया,
जीवन ख़त्म हुआ तो, जीने का ढंग आया,
फुर्सत के वक़्त में ना सुमिरण का वक़्त पाया,
उस वक़्त वक़्त माँगा, जब वक़्त तंग आया,
जीवन ख़तम हुआ तो, जीने का ढ़ंग आया,
जीवन खतम हुआ तो, जीने का ढंग आया,
आयु में ना था सिंह तब, हथियार फ़ेंक डाले,
जब यमराज फ़ौज लेकर, करने को जँग आया,
जीवन खतम हुआ तो, जीने का ढंग आया,
जब शम्मां बुझ गई तो, महफ़िल में रंग आया,
जीवन ख़त्म हुआ तो, जीने का ढंग आया,
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पूज्य राजन जी द्वारा गाया हुवा ये भजन- ज़ीवन ख़तम हुआ तो, जीने का ढंग आया, एक बहुत ही अद्भुत चेतावनी भजन है। करना था सब है बाकी, जो किया नही था करना। समझ में ये बात तब आती है जब पास में समय नही रहता। इस भजन को पूज्य राजन जी ने ग्रा- बेरूवारबारी, बलिया, उत्तर प्रदेश की श्री रामकथा में गाया है
ज़ीवन ख़तम हुआ तो, जीने का ढंग आया। अद्भुत भजन। PUJYA RAJAN JEE BHAJAN
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Author - Saroj Jangir
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