जोगी अलख जगावे कुण्डा खोल रत्नों भजन

जोगी अलख जगावे कुण्डा खोल रत्नों भजन

जोगी, अलख जगावे,
कुंडा खोल रत्नो।
कुंडा खोल रत्नो,
बूहा खोल रत्नो।
जोगी, अलख जगावे।

ओहदे सिर ते जटा सुनहरी,
ओह तां लगदा पौणाहारी।
लाउँदा अम्बरी उड़ारी,
कुंडा खोल रत्नो।
जोगी, अलख जगावे।

ओहदे लम्बे लम्बे केस,
ओहदा जोगी वाला भेस।
ओहदी मोर सवारी,
कुंडा खोल रत्नो।
जोगी, अलख जगावे।

ओहदी उमर नियाणी,
गल करदा सियाणी।
तूं तां नब्ज़ ना जाणी,
कुंडा खोल रत्नो।
जोगी, अलख जगावे।

बालक निका सूरत भोळी,
हथ विच चिमटा, बगल च झोली।
ओहदा रूप नूरानी,
कुंडा खोल रत्नो।
जोगी, अलख जगावे।

जूना गढ़ तों चल के आया,
शाह तलैयां डेरा लाया।
धूणा बोहड़ां हेठ लाया,
कुंडा खोल रत्नो।
जोगी, अलख जगावे।



🙏🙏जोगी अलख जगावे कुण्डा खोल रत्नों 💥💥 बाबा पौणाहारी जी का बहुत ही प्यारा भजन 👏👏 जय बाबे दी ⛳⛳

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जोगी अलख जगावे कुण्डा खोल रत्नों ---
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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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