मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल किशोरी भजन

 मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल किशोरी मेरी कुसुम कली भजन

 
मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल किशोरी मेरी कुसुम कली लिरिक्स Mero Kanha Gulaab Ko Phool Kishori Lyrics

मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल,
किशोरी मेरी कुसुम कली,
मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल,
किशोरी मेरी कुसुम कली,

कान्हाँ मेरो नन्द जू को छौँना
राधे मेरी बृषभानु लली
किशोरी मेरी क़ुसुम कली,
मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल,
किशोरी मेरी कुसुम कली,

कान्हाँ माँगे माखन लौना (कच्चा मक्खन)
राधे भावे मिश्री की डली
किशोरी मेरी कुसुम कली,
मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल,
किशोरी मेरी कुसुम कली,

कान्हाँ खेले नन्द जो के अँगना,
राधे खेले रंगीली गली
किशोरी मेरी कुसुम कली,
मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल,
किशोरी मेरी कुसुम कली,

बृज निधि दर्शन की प्यासी
वो तो भटके गली गली
किशोरी मेरी कुसुम कली,
मेरो कान्हाँ गुलाब को फ़ूल,
किशोरी मेरी कुसुम कली,


मेरो कान्हा गुलाब को फूल किशोरी मेरी कुसुम कली | Mero Kanha Gulab ko Phool Kishori Meri Kusum Kali |
 
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Song : Mero Kanha Gulab ko Phool Kishori Meri Kusum Kali
Singer : Upasana Mehta 
 
जिंदगी में जब छोटी-छोटी चीजें भी प्यारी लगने लगती हैं, तो कान्हा गुलाब का फूल सा महकने लगता है और किशोरी कुसुम कली जैसी कोमल। नंद जी का लाड़ला छोरा और बृषभानु जी की लाड़ली, दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे लगते हैं। कान्हा माखन-मिश्री का स्वाद लेना चाहते हैं तो राधे मिश्री की डली से मन भर लेती हैं।

नंद के आंगन में कान्हा खेलते हैं और राधे रंगीली गलियों में। बृज की धरती दर्शन की प्यासी बनी रहती है, इसलिए भक्त गली-गली भटकते फिरते हैं। एक झलक पाते ही सारा मन महक उठता है। जब भी दिल में कोई सूखापन लगे या प्यास जागे, बस इन दोनों की जोड़ी को याद कर लो। गुलाब की महक और कुसुम कली की कोमलता मन को तरोताजा कर देती है और जीवन फिर से रंगीन हो जाता है।
 
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