सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं भजन
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं भजन
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं
तेरी चुनरी में हे माँ वो चाँद सितारे हैं,
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं
पूरब में सूरज की लाली जब छाती है,
लगता चुनरी ओढ़े तू धरती पे आती है,
तेरी ही आभा के ये सारे उजारे हैं,
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं,
चमकीले ये मणियाँ फीकी पड़ जाती हैं,
भाव से भरी चुनरी में जब सज जाती है,
तारों के लटकन से झड़े इसके किनारे हैं,
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं,
जब मन तेरे दर्शन को मैया ललचाता है
चुनरी के रंग में ही चँदा रंग जाता है
आजा ओढ़न को माँ, आकाश पुकारे है
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं
तेरी चुनरी में हे माँ वो चाँद सितारे हैं,
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं
पूरब में सूरज की लाली जब छाती है,
लगता चुनरी ओढ़े तू धरती पे आती है,
तेरी ही आभा के ये सारे उजारे हैं,
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं,
चमकीले ये मणियाँ फीकी पड़ जाती हैं,
भाव से भरी चुनरी में जब सज जाती है,
तारों के लटकन से झड़े इसके किनारे हैं,
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं,
जब मन तेरे दर्शन को मैया ललचाता है
चुनरी के रंग में ही चँदा रंग जाता है
आजा ओढ़न को माँ, आकाश पुकारे है
सुन्दर कहलाते जो इस जग के नजारे हैं
Maa Bhajan | सुन्दर कहलाते जो इस जग के नज़ारे हैं | Neelkant Modi (New Rani Dadi Bhajan 2020)
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Song: Sundar Kehlate
Singer: Neelkant Modi
Music: Akash Devi
Lyricist: Akash Sharma
DOP: Manish Dev
Director: Bablu Raj
Singer: Neelkant Modi
Music: Akash Devi
Lyricist: Akash Sharma
DOP: Manish Dev
Director: Bablu Raj
जब माँ की चुनरी फैल जाती है तो सारा जग सुंदर लगने लगता है। पूरब में सूरज की लाली छाती है तो लगता है जैसे माँ खुद धरती पर चुनरी ओढ़कर आ गई हों। उनकी आभा से ही चाँद, सितारे, उजाले और हर नजारा चमक उठता है।
चमकीली मणियां भी फीकी पड़ जाती हैं जब माँ की भाव भरी चुनरी सज जाती है। तारों के लटकन जैसे किनारे झड़ते रहते हैं। मन जब उनके दर्शन को ललचाता है तो चंदा भी उनके रंग में रंग जाता है। आकाश खुद पुकारने लगता है – आ जा माँ, चुनरी ओढ़ ले। माँ की चुनरी में बस एक अनोखी मिठास है जो देखते ही दिल को ठंडक पहुँचा देती है। उनकी कृपा से हर नजारा सुंदर हो जाता है और मन में शांति छा जाती है।
चमकीली मणियां भी फीकी पड़ जाती हैं जब माँ की भाव भरी चुनरी सज जाती है। तारों के लटकन जैसे किनारे झड़ते रहते हैं। मन जब उनके दर्शन को ललचाता है तो चंदा भी उनके रंग में रंग जाता है। आकाश खुद पुकारने लगता है – आ जा माँ, चुनरी ओढ़ ले। माँ की चुनरी में बस एक अनोखी मिठास है जो देखते ही दिल को ठंडक पहुँचा देती है। उनकी कृपा से हर नजारा सुंदर हो जाता है और मन में शांति छा जाती है।
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