रघुवर संग खेलत जनक दुलारी अवधपुरी भजन

रघुवर संग खेलत जनक दुलारी अवधपुरी में होली भजन


रघुवर संग खेलत जनक दुलारी,
अवधपुरी में होली,
अवधपुरी में होली।

केहू के भीजत पाग पगड़िया,
केहू के भीजत पाग पगड़िया,
केहू के भीजत चोली,
अवधपुरी में होली।

कनक कलश में केसर घोले,
कनक कलश में केसर घोले,
भर मारत पिचकारी,
अवधपुरी में होली।

उड़त गुलाल लाल भयो अम्बर,
उड़त गुलाल लाल भयो अम्बर,
बरसत रंग की धारी,
अवधपुरी में होली।

जनक लली को मुख रंग डारो,
जनक लली को मुख रंग डारो,
रंग गए अवधबिहारी,
अवधपुरी में होली।

धन धन भाग सखी नैनन के,
धन धन भाग सखी नैनन के,
निरखत छवि अति प्यारी,
अवधपुरी में होली।

रघुवर संग खेलत जनक दुलारी,
अवधपुरी में होली,
अवधपुरी में होली।



पारंपरिक होली गीत/Raghubar Sang khelat Janak Dulari Awadhpuri me Holi

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अवधपुरी की होली में श्रीराम के संग माता सीता जी सखियों के बीच प्रेमपूर्ण उमंग और रंगारंग आनंद की वर्षा होती है। केसर मिश्रित गुलाल की पिचकारियाँ चलती हैं, पगड़ियाँ, चोलियाँ और वस्त्र रंगों से सराबोर हो जाते हैं, आकाश लालिमा से नहा जाता है। साधक का हृदय जनकनंदिनी के मुख पर रंग चढ़ाते हुए अवधबिहारी के स्वरूप की अति मनोहर छवि निहारने लगता है। भाग्यवान सखियाँ उस दृश्य को देखकर धन्य हो उठती हैं, जहाँ राम‑सीता का विहार हर आनंद को दोगुना कर देता है और प्रेम का रंग जीवन को पावन बना देता है।

श्रीरामचंद्र जी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जिनके चरणों में सारा ब्रह्मांड शरणागत हो जाता है। माता जानकी उनके विपरीत रूप हैं, जो त्याग, भक्ति और करुणा की जीवंत मूर्ति हैं। अवधपुरी उनके अवतार लीला का पावन स्थल है, जहाँ उनकी होली केवल रंगों की नहीं, प्रेम, विश्वास और मर्यादा के रंगों की होली है। उनका सान्निध्य पापों को धो देता है, हृदय को शांति से भर देता है और साधक को रामराज्य का सच्चा स्वरूप अनुभव करा देता है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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