गुण गाये गुण ना कटै मीनिंग

गुण गाये गुण ना कटै मीनिंग

गुण गाये गुण ना कटै, रटै न राम बियोग।
अह निसि हरि ध्यावै नहीं, क्यूँ पावै दुरलभ जोग॥

Gun Gaye Gun Na kate, Rate Na Raam Biyog,
Ah Nisi Hari Dhyave Nahi, Kyu Pave Durlabh Jog.
 
गुण गाये गुण ना कटै, रटै न राम बियोग। अह निसि हरि ध्यावै नहीं, क्यूँ पावै दुरलभ जोग॥

कबीर दोहा हिंदी मीनिंग

मात्र हरी के नाम का गुणगान कुछ समय तक कर लेने से सांसारिक बंधनों से मुक्ति सम्भव नहीं हो पाती है। ईश्वर की प्राप्ति के लिए दिन रात हरि के नाम का सुमिरण करना पड़ता है, अन्यथा दुर्लभ योग (भक्ति) की प्राप्ति कैसे सम्भव हो सकती है।

भाव है की साधक को दिन रात ईश्वर के नाम की रट लगानी चाहिए और अनवरत रूप से हरी के नाम का जाप करना चाहिए क्योंकि भक्ति बहुत दुर्लभ है। कबीर साहेब की इस साखी में 'गुण' शब्द का उपयोग दो जगह हुआ है। एक गुण का अर्थ 'रस्सी/माया का पाश' है तो दूसरे स्थान पर गुण का अर्थ हरी गुण गान से लिया गया है, इसलिए इस साखी में यमक अलंकार का प्रयोग हुआ है। 

कबीर दोहे के शब्दार्थ

गुण - ईश्वर के नाम का सुमिरण।
गुण - रस्सी, माया जनित बंधन।
बियोग- वियोग/बिछडाव।
अह-दिन।
निसि - रात।
हरि ध्यावै नहीं,
क्यूँ पावै
दुरलभ-दुर्लभ।
जोग-योग।  

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें

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