
भोले तेरी भक्ति का अपना ही
कबीर दोहा/साखी मीनिंग- जिस समय का श्रष्टि की उत्पत्ति नहीं हुई थी उस समय ना तो कोई बाजार था और नाही कोई नगर ही था. उस समय भी राम भक्त मौजूद रहा है जिसने विकट मार्ग का अनुसरण किया है. राम भक्त सदा से ही रहे हैं और रहेंगे. जिन्होंने सत्य को प्राप्त किया है वे श्रष्टि के आदिकाल से रहे हैं. सांसारिक व्यापार बाद में शुरू हुए है. पट से आशय यहाँ वस्त्र से भी है.
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं एक विशेषज्ञ के रूप में रोचक जानकारियों और टिप्स साझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |