ओ मैया तू जग की पालनहार मातारानी भजन
ओ मैया तू जग की पालनहार भजन
माता ओ माता, जीवन की दाता,
महिमा तुम्हारी अपार,
ओ मैया तू जग की पालनहार ॥
जो भी आये तेरी शरण में,
तेरी शरण में, तेरे चरण में।
वो भक्ति पाता, वो शक्ति पाता,
करती हो तुम बेड़ा पार।
ओ मैया तू जग की पालनहार ॥
भगत सभी तेरे द्वार खड़े हैं,
भिक्षा कृपा की माँग रहे हैं।
जो कोई आता, खाली न जाता,
करती हो उसका उद्धार।
ओ मैया तू जग की पालनहार ॥
महिमा तुम्हारी अपार,
ओ मैया तू जग की पालनहार ॥
जो भी आये तेरी शरण में,
तेरी शरण में, तेरे चरण में।
वो भक्ति पाता, वो शक्ति पाता,
करती हो तुम बेड़ा पार।
ओ मैया तू जग की पालनहार ॥
भगत सभी तेरे द्वार खड़े हैं,
भिक्षा कृपा की माँग रहे हैं।
जो कोई आता, खाली न जाता,
करती हो उसका उद्धार।
ओ मैया तू जग की पालनहार ॥
Mata O Mata Full Audio Song | JASWANT SINGH | Devotional Song | T-Series Bhakti Sagar
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Bhajan: MATA O MATA
Singer: JASWANT SINGH
Lyricist: BRAMHALEEN SWAMI AKHILESH JI
Director: JASWANT SINGH
Artist: JASWANT SINGH
Album: PRABHU KI JYOT
Music Label: T-Series
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Album: PRABHU KI JYOT
Music Label: T-Series
माता रानी की वह महिमा जो अपार कही जाती है, सचमुच ऐसी है जैसे एक अंधेरी रात में एक माँ का आँचल। जो भी उनकी ओर आँख मिचमिचाते हुए पहुँचता है, उसे चुपचाप भीतर से एक ताकत मिल जाती है, जैसे पहले कभी भूल गया हुआ आशीर्वाद अचानक याद आ गया हो। उनकी शरण में आया कोई भी व्यक्ति धीरे‑धीरे महसूस करने लगता है कि उसका भक्ति‑भाव जग गया है, जैसे रूखी जमीन में अचानक ही रस टपकने लगे हों। इस भाव को पकड़कर जीव अनुभव करता है कि जो इश्वर की कृपा से बेड़ा पार लगाई जाती है, वह किसी ऊँचे पहाड़ या अलग जगह से नहीं, घर जैसी ही निकटता से आती है।
भक्त उनके द्वार खड़े होकर बस एक ही माँग करते हैं – थोड़ी सी दया, थोड़ा सा ध्यान, थोड़ा सा साथ। माता उन्हें खाली हाथ नहीं लौटातीं; जिस भी रूप में आवश्यकता होती है, उसी तरह से उनका उद्धार कर देती हैं। कभी वह दुख कम कर देती है, कभी दिल में नई उम्मीद भर देती है, तो कभी इतनी शक्ति दे देती है कि खुद भी अपने आप को बदलने लगता है। ऐसे में लगता है कि जीवन की हर छोटी‑बड़ी कशमकश में अगर कोई आधार है, तो वह इसी मातृ‑प्रेम की छाया है। साधक को इसी भाव से यह अहसास मिलता है कि जब तक किसी माँ की ओर दिल झुका है, नैया भर जाए या न भर जाए, उसे डूबने नहीं दिया जाता। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री माँ जी की।
भक्त उनके द्वार खड़े होकर बस एक ही माँग करते हैं – थोड़ी सी दया, थोड़ा सा ध्यान, थोड़ा सा साथ। माता उन्हें खाली हाथ नहीं लौटातीं; जिस भी रूप में आवश्यकता होती है, उसी तरह से उनका उद्धार कर देती हैं। कभी वह दुख कम कर देती है, कभी दिल में नई उम्मीद भर देती है, तो कभी इतनी शक्ति दे देती है कि खुद भी अपने आप को बदलने लगता है। ऐसे में लगता है कि जीवन की हर छोटी‑बड़ी कशमकश में अगर कोई आधार है, तो वह इसी मातृ‑प्रेम की छाया है। साधक को इसी भाव से यह अहसास मिलता है कि जब तक किसी माँ की ओर दिल झुका है, नैया भर जाए या न भर जाए, उसे डूबने नहीं दिया जाता। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री माँ जी की।
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Admin - Saroj Jangir
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