सरवरिया री तीर खड़ी नानी नीर भजन
सरवरिया री तीर खड़ी नानी नीर बहावे है भजन
नानी बाई का भात भजन बहुत प्रसिद्द भजन है जिसमे नानी बाई के सगा भाई नहीं होने के कारण उसका भात भरने के सबंध में यह भजन है। श्री कृष्ण बाई का भात करते हैं। यह भजन नरसी भगत और बाई नानी का कृष्ण भजन है।
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है,
जामण जाए बीर बिना कुण,
भात भरण न आवै है।
एक दिन म्हारो भोळो बाबुल,
अरब पति कहलायो थो,
अन धन रा भंडार घणेरा,
ओर छोर नहीं पायो हो,
ऊँचा ऊँचा महल मालिया,
नगर सेठ केहलायो थो,
अण गिनती रा नौकर चाकर,
याद घणेरी आवै है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
लाड़ प्यार में पली लाडली,
बड़ा घरां परणाई थी,
हे दान दायजो हाथी घोड़ा,
दास दासीया लाई ओ,
सोना चांदी हीरा मोती,
गाड़ा भर भर ल्याई थी,
इतरी बाता याद करूँ जद,
हिवड़ो भर भर आवे ओ,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
तेरे भरोसे सेठ साँवरा,
भोळो बाबुल आयो है,
गोपी चंदन और तूबड़ा,
साधा ने संग ल्यायो है,
घर घर माँगत फिरे सूरिया,
म्हारो मान घटायो है,
देवरीयो म्हाने ताना देवे है,
नणंदल आख दिखावे है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
और संगा ने महल मालियाँ,
टुटी टपली नरसी ने,
ओर सगा ने सोल दुसाला,
फाटी गुदड़ी नरसी ने,
ओर सगा ने लाडू पेड़ा,
सुखी रोटी नरसी ने,
डूब मरुँ पर घर नहीं आऊं,
बाबुल मन लजावे ओ,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
विपद होय जद नानी बाई,
श्याम प्रभु ने ध्यायो है,
राधा रूकमणि लेन है सावंरो,
सेठ सांवरो आयो है,
भात भरणने धान दायजो,
गाडा भर भर लायो है,
सावरी ने निरख बावली,
बाता हु बतलावे है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
कुण से नगर पधारा हो थे,
कुण रा हो मजमान थे,
नैनी बाई रो भाई भात भरणने,
जासा नगर अणजार जी,
नरसीलो मारो सेठ पुराणो,
मारो अनदातार जी,
नैनी बाई मारी धरम बहन है,
सावरीयो समजावे जी,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
बात सुणी जद साँवरिया री,
सारो दुखड़ो दूर हुयो,
भगत मंडली सेठ साँवरिया रा,
हरख हरख जस गावै जी,
सवारियां री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है,
जामण जाए वीर बिना कुण,
भात भरण न आवै है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
आ नानी नीर बहावे है,
जामण जाए बीर बिना कुण,
भात भरण न आवै है।
एक दिन म्हारो भोळो बाबुल,
अरब पति कहलायो थो,
अन धन रा भंडार घणेरा,
ओर छोर नहीं पायो हो,
ऊँचा ऊँचा महल मालिया,
नगर सेठ केहलायो थो,
अण गिनती रा नौकर चाकर,
याद घणेरी आवै है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
लाड़ प्यार में पली लाडली,
बड़ा घरां परणाई थी,
हे दान दायजो हाथी घोड़ा,
दास दासीया लाई ओ,
सोना चांदी हीरा मोती,
गाड़ा भर भर ल्याई थी,
इतरी बाता याद करूँ जद,
हिवड़ो भर भर आवे ओ,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
तेरे भरोसे सेठ साँवरा,
भोळो बाबुल आयो है,
गोपी चंदन और तूबड़ा,
साधा ने संग ल्यायो है,
घर घर माँगत फिरे सूरिया,
म्हारो मान घटायो है,
देवरीयो म्हाने ताना देवे है,
नणंदल आख दिखावे है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
और संगा ने महल मालियाँ,
टुटी टपली नरसी ने,
ओर सगा ने सोल दुसाला,
फाटी गुदड़ी नरसी ने,
ओर सगा ने लाडू पेड़ा,
सुखी रोटी नरसी ने,
डूब मरुँ पर घर नहीं आऊं,
बाबुल मन लजावे ओ,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
विपद होय जद नानी बाई,
श्याम प्रभु ने ध्यायो है,
राधा रूकमणि लेन है सावंरो,
सेठ सांवरो आयो है,
भात भरणने धान दायजो,
गाडा भर भर लायो है,
सावरी ने निरख बावली,
बाता हु बतलावे है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
कुण से नगर पधारा हो थे,
कुण रा हो मजमान थे,
नैनी बाई रो भाई भात भरणने,
जासा नगर अणजार जी,
नरसीलो मारो सेठ पुराणो,
मारो अनदातार जी,
नैनी बाई मारी धरम बहन है,
सावरीयो समजावे जी,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
बात सुणी जद साँवरिया री,
सारो दुखड़ो दूर हुयो,
भगत मंडली सेठ साँवरिया रा,
हरख हरख जस गावै जी,
सवारियां री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है,
जामण जाए वीर बिना कुण,
भात भरण न आवै है,
सरवरिया री तीर खड़ी,
आ नानी नीर बहावे है।
सरवरिया री तीर खड़ी,आ नैनी नीर बहावे है|| स्वामी सच्चिदानंद जी व राजू महाराज की जुगलबंदी से|पहली बार
Saravariya Ri Tir Khadi,
Aa Naani Nir Bahaave Hai,
Jaaman Jae Bir Bina Kun,
Bhaat Bharan Na Aavai Hai.
Aa Naani Nir Bahaave Hai,
Jaaman Jae Bir Bina Kun,
Bhaat Bharan Na Aavai Hai.
स्वामी सच्चिदानंद जी आचार्य व सन्त राजूराम जी महाराज की #जुगलबंदी में बहुत ही शानदार भजन!!
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